भारत की जनगणना 2027: छत्तीसगढ़ में पहली बार डिजिटल जनगणना, कोई ओटीपी नहीं मांगी जाएगी -  मनोज कुमार पिंगुआ

भारत की जनगणना 2027: छत्तीसगढ़ में पहली बार डिजिटल जनगणना, कोई ओटीपी नहीं मांगी जाएगी -  मनोज कुमार पिंगुआ

भारत की जनगणना 2027: छत्तीसगढ़ में पहली बार डिजिटल जनगणना, कोई ओटीपी नहीं मांगी जाएगी -  मनोज कुमार पिंगुआ

रायपुर। भारत की जनगणना 2027 को लेकर छत्तीसगढ़ शासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में 13 अप्रैल को सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ एवं नागरिक पंजीकरण निदेशक छत्तीसगढ़ कार्तिकेय गोयल ने विस्तृत जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि भारत की जनगणना विश्व की सबसे बड़ी प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय प्रक्रियाओं में से एक है। वर्ष 1872 से शुरू हुई यह प्रक्रिया 2027 में 16वीं बार आयोजित की जाएगी, जबकि स्वतंत्रता के बाद यह 8वीं जनगणना होगी। यह जनगणना देश और राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराएगी।

दो चरणों में होगी जनगणना

जनगणना 2027 का कार्य छत्तीसगढ़ में दो चरणों में संपन्न होगा—

प्रथम चरण (मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना): 01 मई से 30 मई 2026

द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): फरवरी 2027

इसके पहले 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिसमें नागरिक स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

पहली बार डिजिटल होगी जनगणना

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर 33 निर्धारित प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र करेंगे, जिसमें मकान की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं और परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।

घर बंद मिलने पर तीन बार आएंगे प्रगणक

पत्रकार वार्ता में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कार्तिकेय गोयल ने बताया कि यदि किसी घर में पहली बार कोई नहीं मिलता या घर बंद रहता है, तो प्रगणक अधिकतम तीन बार उस घर का दौरा करेंगे। इसके बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर उस घर को “कोई निवास नहीं” के रूप में दर्ज किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रगणक और पर्यवेक्षक स्थानीय शिक्षक या क्षेत्र के परिचित व्यक्ति होंगे, जिन्हें लगभग 180 घरों की जिम्मेदारी दी जाएगी।

ओटीपी नहीं मांगा जाएगा, रहें सतर्क

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी प्रकार का ओटीपी नहीं मांगा जाएगा। जानकारी केवल पूछकर दर्ज की जाएगी और यह प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क होगी।

यदि कोई व्यक्ति जनगणना के नाम पर ओटीपी मांगता है, तो उसे साइबर अपराध मानते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है।

गोपनीय रहेगी पूरी जानकारी

जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एकत्र की गई सभी व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इसका उपयोग न तो टैक्स, पुलिस या किसी जांच में किया जाएगा और न ही इसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इन आंकड़ों का उपयोग केवल विकास योजनाएं बनाने के लिए किया जाएगा।

बड़े पैमाने पर होगी तैनाती

राज्य में इस कार्य के लिए लगभग 62,500 अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जिसमें 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं।

यह कार्य 33 जिलों, 195 नगरीय निकायों, 252 तहसीलों और लगभग 19,978 गांवों में किया जाएगा।

हेल्पलाइन नंबर जारी

जनगणना से संबंधित जानकारी के लिए राज्य सरकार द्वारा टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है, जो 16 अप्रैल 2026 से चालू हो जाएगा।

अधिकारियों ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जनगणना कार्य में सहयोग करें और सही जानकारी प्रदान कर राज्य एवं देश के विकास में भागीदार बनें।