अमूल ने डेयरी क्षेत्र में डिजिटल तकनीक को बनाया बदलाव का आधार, 'गाय से क्लाउड और क्लाउड से ग्राहक' तक पहुंची सहकारिता

अमूल ने डेयरी क्षेत्र में डिजिटल तकनीक को बनाया बदलाव का आधार, 'गाय से क्लाउड और क्लाउड से ग्राहक' तक पहुंची सहकारिता

अमूल ने डेयरी क्षेत्र में डिजिटल तकनीक को बनाया बदलाव का आधार, 'गाय से क्लाउड और क्लाउड से ग्राहक' तक पहुंची सहकारिता

अमूल ने डेयरी सहकारिता को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए पशु स्वास्थ्य, कृत्रिम गर्भाधान, दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान और आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक तकनीकी प्रणालियों से एकीकृत किया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित किसान सहायता, डिजिटल पशु चिकित्सा सेवा, पशुओं की गतिविधियों की निगरानी के लिए स्मार्ट नेक बेल्ट, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, जीपीएस आधारित दूध टैंकर निगरानी और ड्रोन आधारित जैविक खेती जैसी पहलें अमूल के डिजिटल परिवर्तन का हिस्सा हैं। यह जानकारी अमूल की मानव संसाधन प्रमुख डॉ. प्रीति शुक्ला ने गुजरात के पांच दिवसीय अध्ययन दौरे पर आए छत्तीसगढ़ के पत्रकार दल को अमूल डेयरी की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए दी।

डॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल का डिजिटल परिवर्तन 'गाय से क्लाउड और क्लाउड से ग्राहक' की अवधारणा पर आधारित है। इसके तहत पशु के जन्म और पहचान से लेकर उसके स्वास्थ्य, प्रजनन और टीकाकरण तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। किसान डिजिटल माध्यम से पशु चिकित्सा सेवाएं और कृत्रिम गर्भाधान की बुकिंग कर सकते हैं। इससे सेवा की पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ किसानों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

उन्होंने बताया कि अमूल ने पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार के लिए कई तकनीकी पहल की हैं। स्मार्ट नेक बेल्ट के माध्यम से पशु की गतिविधियों, भोजन, आराम और मद चक्र की निगरानी की जा रही है। इससे पशु के बीमार होने के शुरुआती संकेत मिलने और कृत्रिम गर्भाधान के लिए सही समय की पहचान में मदद मिलती है। किसानों को यह सुविधा लगभग तीन रुपये प्रति पशु प्रतिदिन के किराये पर उपलब्ध कराने का मॉडल विकसित किया गया है।

अमूल ने कृत्रिम गर्भाधान की सफलता बढ़ाने के लिए डिजिटल गलन इकाई और स्मार्ट तरल नाइट्रोजन पात्र जैसी तकनीकों को भी अपनाया है। वहीं, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के उपयोग से मादा बछड़े के जन्म की संभावना बढ़ाने तथा भ्रूण स्थानांतरण और आईवीएफ तकनीक के माध्यम से उच्च उत्पादक पशुओं की नई पीढ़ी तैयार करने पर भी काम किया जा रहा है।

पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में ग्राम संसाधन व्यक्ति की व्यवस्था के माध्यम से गांवों में प्रारंभिक जांच और बीमारी की पहचान की जा रही है। इस पहल में ग्रामीण महिलाओं को भी जोड़ा जा रहा है। स्वच्छ दूध परीक्षण, थनैला रोग की पहचान, टीकाकरण की जीपीएस आधारित निगरानी और गर्भ जांच जैसी पहलों से पशु स्वास्थ्य प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

अमूल ने किसानों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल सहायक 'सरलाबेन' भी विकसित किया है। किसान अपनी पहचान संख्या के आधार पर अपने पशुओं से संबंधित जानकारी और सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल पशु बाजार तथा दूध सहकारी समितियों में दूध की मात्रा, गुणवत्ता और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करने की व्यवस्था भी विकसित की गई है।

दूध की आपूर्ति श्रृंखला में जीपीएस आधारित टैंकर निगरानी और मार्ग अनुकूलन के साथ स्वचालित नमूना प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इससे दूध संग्रहण केंद्र से संयंत्र तक दूध और उसके नमूनों की निगरानी अधिक पारदर्शी तरीके से की जा सकती है। डेयरी संयंत्रों में कागज रहित प्रेषण, डिजिटल फाइल प्रबंधन, ऑनलाइन अनुमोदन और स्वचालित भंडारण जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया गया है।

अमूल ने ग्रामीण युवाओं के लिए 'मिल्क-ओ-बाइक' पहल भी शुरू की है। इसके तहत पोर्टेबल दूध दुहने वाली मशीन के माध्यम से ग्रामीण युवा किसानों के घर जाकर दूध निकालने की सेवा उपलब्ध कराते हैं। इससे किसानों का श्रम कम होने के साथ युवाओं के लिए रोजगार का अवसर भी उपलब्ध हो रहा है।

डॉ. शुक्ला ने बताया कि अमूल का लक्ष्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से किसान, पशु, दुग्ध सहकारी समिति और उपभोक्ता को एकीकृत करना है। इस पूरी व्यवस्था से पारदर्शिता, दक्षता और समयबद्धता बढ़ाने के साथ पशुपालन को अधिक वैज्ञानिक और किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल रही है।