कांग्रेस पार्टी देश भर में धरना देने की बात कर रही है, उन्हें धरना देने का अधिकार है लेकिन जमीन और फंड लूटने का अधिकार नहीं है।

कांग्रेस पार्टी देश भर में धरना देने की बात कर रही है, उन्हें धरना देने का अधिकार है लेकिन जमीन और फंड लूटने का अधिकार नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा सांसद  रविशंकर प्रसाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिन्दु
16 April 2025

 • कांग्रेस पार्टी देश भर में धरना देने की बात कर रही है, उन्हें धरना देने का अधिकार है लेकिन जमीन और फंड लूटने का अधिकार नहीं है।

• 1937 में नेशनल हेराल्ड को शुरू किया गया था, शुरुआत में इसके 5 हजार शेयर होल्डर्स थे, यानी नेशलन हेराल्ड कभी नेहरू खानदान की जागीर नहीं रहा। इसमें उस समय के बड़े-बड़े क्रांतिकारियों का भी सहयोग था। 

 • नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन 2008 में बंद हो गया, क्योंकि वह आर्थिक रूप से विफल रहा। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने 90 करोड़ रुपये की राशि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को दी, जो इस अखबार को प्रकाशित करती थी।

• कांग्रेस एक राजनीतिक पार्टी है जिसे कई प्रकार की छूट मिलती हैं लेकिन राजनीतिक पार्टी किसी निजी संस्था को पार्टी का फंड नहीं दे सकती, यह पूरी तरह से गैर कानूनी है।

• कांग्रेस ने नेशनल हेराल्ड की पूरी संपत्ति को गांधी परिवार के हाथों में लाने के लिए एक कॉर्पोरेट षड्यन्त्र रचा। यंग इंडिया नाम की एक कंपनी बनाई गई जिसमें 38% हिस्सा सोनिया गांधी का और 38% राहुल गांधी का रखा गया। 9 करोड़ के इक्विटी शेयर इस कंपनी को ट्रांसफर किए गए।

• 9 करोड़ के इक्विटी शेयर के ट्रांसफर के बाद यंग इंडिया कंपनी के हाथ में नेशलन हेराल्ड की पूरी संपत्ति आ गई, जिसमें दिल्ली में बहादुर शाह ज़फ़र पर एक संपत्ति, लखनऊ, मुंबई, भोपाल और पटना की हजारों-करोड़ की संपत्ति शामिल है।


• कांग्रेस ने बताया कि यंग इंडिया फाउंडेशन चैरिटी के लिए बनाया गया था लेकिन आज तक उस से क्या चैरिटी हुई इसकी कोई जानकारी उपलध नहीं है।

• ईडी ने कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष मोती लाल वोहरा से पूछताछ की थी, उसके बाद पवन वंसल से पूछताछ हुई, उसके बाद सोनिया और राहुल गांधी से पूछताछ की गई।

• पूरे मामले में जो 90 करोड़ रुपये लोन का बकाया था उसकी जगह 50 लाख देकर पूरा लोन राइट ऑफ करा लिया गया। यानी 50 लाख में हजरों करोड़ों की संपत्ति को अपने नाम करा लिया।

• कांग्रेस परिवार के एक और सदस्य हरियाणा में 3 करोड़ की जमीन खरीद कर उसे 58 करोड़ में बेच देते हैं। देश को यह देखना चाहिए कि यह ‘गांधी मॉडल ऑफ़ डेवलपमेंट है’।

• जब ईडी ने मामले को टेक अप किया, सब कुछ समझा और अपनी रिपोर्ट सेक्शन 8 में कोर्ट में दायर की।

• क्रिमिनल लॉ में जब कंप्लेन होती है तो उसके बाद जांच होती है लेकिन इस मामले में जांच के बाद ही कंप्लेन करते हैं। कोर्ट ने कहा है कि अब 21 तारीख को सुनवाई होगी, बस इसी को लेकर हाय तौबा हो रही है।

• सोनिया गांधी और राहुल गांधी बेल पर हैं। उन्होंने पूरी कार्रवाई को खारिज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। सिर्फ यही राहत मिली कि आप खुद कोर्ट में अपीयर न होकर अपने वकील के माध्यम से अपीयर हो सकते हैं।

• यही पिछले चार सालों से चल रहा है, जिसमें राहुल गांधी और सोनिया गांधी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जहां कानून अपना काम कर रहा है, वहां कांग्रेस धरना-प्रदर्शन क्यों करना चाहती है?

• एक मेम्बरान-ए-पार्लियामेंट, देश के नामी गिरामी वकील भी इसपर अजीब प्रकार के बेबुनियाद तर्क दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी सोनिया गांधी और राहुल गांधी से सवाल पूछना चाहती है कि क्या कानून को अपना काम नहीं करना चाहिए?

• क्या हजारों करोड़ की संपत्ति पर कांग्रेस ने गैरकानूनी तरीकों से षड्यंत्र रचकर कब्ज़ा कर लिया तो क्या इस पर चुप रहना चाहिए?

• नेशनल हेराल्ड की कहानी बड़ी दिलचस्प है, सरदार पटेल जी ने कहा था कि जिस तरह के लोगों से इस अखबार के लिए पैसा लिया जा रहा है, वह ठीक नहीं है। यह चिंता का विषय है। यह सब प्रामाणिक कांग्रेसी नेता थे और वह सारी चिट्ठियां मौजूद हैं। नेहरू जी ने क्या कहा, सुधा पटेल ने क्या कहा, सब कुछ दर्ज है।

• यहां तक कि उस समय  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने भी इस अखबार के लिए बहुत धन एकत्र किया। कहा गया था कि यह अखबार देश की आवाज़ बनेगा, लेकिन इसे नेहरू परिवार की आवाज़ बना दिया गया।

• सवाल है कि सरदार पटेल क्या सोचते थे? चंद्रभानु गुप्ता की आत्मकथा में इसका ज़िक्र है। इसका अतीत और वर्तमान, दोनों को समझना ज़रूरी है। इस देश में आज इतने अखबार और न्यूज़ चैनल है। फिर भी वह अखबार, जिसे कांग्रेस पार्टी और उसकी सरकारों का पूरा संरक्षण और आशीर्वाद प्राप्त था, वह क्यों नहीं चल पाया?

क्योंकि वह अखबार चलाने के लिए नहीं था, वह अखबार था विज्ञापन बटोरने और सरकार से संपत्ति हथियाने का एक उपकरण।जब यंग इंडिया को ट्रांसफर किया गया, तब भी लगभग 25–26 करोड़ रुपये का विज्ञापन आया।

• वह अखबार जो आज़ादी की लड़ाई में देश के सच्चे सिपाहियों की आवाज़ था, उसे कांग्रेस ने आपने निजी व्यापार में बदल दिया और अपना एटीएम बना लिया।

• क्या एक ऐसा समाचारपत्र, जिसे आज़ादी की लड़ाई के दौरान ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने के लिए शुरू किया गया था, बाद में सिर्फ कांग्रेस पार्टी के धन कमाने का ज़रिया बनकर रह गया? क्या यह उचित है?

• भारतीय जनता पार्टी इसकी घोर भर्त्सना करती है, कांग्रेस पार्टी की प्रतिक्रिया और ईडी को धमकाने की भाषा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह देश की विधिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है।