श्रम विभाग की लापरवाही से श्रमिकों की मौत - सुशील सन्नी अग्रवाल

श्रम विभाग की लापरवाही से श्रमिकों की मौत - सुशील सन्नी अग्रवाल

श्रम विभाग की लापरवाही से श्रमिकों की मौत - सुशील सन्नी अग्रवाल

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में बिना किसी सुरक्षा उपकरण के गटर की सफाई करने उतरे तीन सफाई कर्मचारियों की असमय मृत्यु ने एक बार फिर औद्योगिक और प्रबंधकीय लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण की गई हत्या है।

अस्पताल परिसर के सीवरेज टैंक की सफाई के लिए तीन मजदूरों को बिना किसी ऑक्सीजन मास्क, लाइफ जैकेट या सुरक्षा किट के जहरीले गटर में उतार दिया गया। दम घुटने से तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। प्रशासन और संबंधित ठेकेदार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मृतकों के परिजनों को मात्र 30-30 लाख रुपये का मुआवजा देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया है।

यह घटना किसी एक संस्थान तक सीमित नहीं है। प्रदेश भर में ऐसे तमाम कारखाने और संस्थान संचालित हैं, जहाँ मजदूरों को जान जोखिम में डालकर काम करने पर मजबूर किया जाता है।
आज भाजपा सरकार श्रम विभाग और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में पूरी तरह विफल हो रही है। आगे अग्रवाल जी ने कहा कि  पूर्व की सरकार में इन बातों का विशेष ध्यान रखा जाता था किंतु वर्तमान बीजेपी सरकार के श्रम मंत्री को श्रम विभाग की तरफ झांकते भी नहीं है केवल शराब की काली कमाई में व्यस्त है, यह सरासर श्रम विभाग की अनदेखी के कारण ऐसा हो रहा हैं। सभी कारखानों और संस्थानों में तत्काल 'सेफ्टी ऑडिट' अनिवार्य किया जाए, सीवरेज सफाई के लिए मशीनीकरण को पूरी तरह लागू किया जाए ताकि भविष्य में किसी और को गटर में न उतरना पड़े, सरकारी तंत्र द्वारा कार्यस्थलों का औचक निरीक्षण किया जाए ताकि सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो।