कोरबा जिला जेल से फरार हुए चार सजा आप्ता: जेलर की भूमिका संदिग्ध, सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
मन्नू मानिकपुरी संवाददाता बिलासपुर
कोरबा, छत्तीसगढ़ | 3 अगस्त 2025 :- कोरबा जिला जेल से चार सजा आप्ता 1.चंद्रशेखर रतिया 2.राजा कंवर 3.दशरथ सिदार 4.शर्मा रिंकू
के फरार होने की सनसनीखेज घटना ने जेल प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना दोपहर 3:00 बजे से 3:15 बजे के बीच की है, जब चार विचाराधीन बंदी सुरक्षा तंत्र को धता बताते हुए जेल से भाग निकले। इस घटना ने जेल प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है, और जेलर की भूमिका सीधे तौर पर शक के दायरे में आ गई है।
सुरक्षा तंत्र की खुली पोल
जेल जैसी उच्च सुरक्षा वाली जगह से तीन कैदियों का फरार होना कोई मामूली घटना नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि जेल की बाउंड्री वॉल में लगा करंट सुरक्षा सिस्टम उस वक्त बंद था, यानी फरारी के लिए रास्ता पूरी तरह से खुला था। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल के पास लोहे का सरिया** रखा मिला, जिसे कैदियों ने भागने में इस्तेमाल किया। इस तरह की ढिलाई तभी संभव है जब भीतर के किसी कर्मचारी की मिलीभगत** हो।
देर से दी गई सूचना, सायरन भी नहीं बजा
एक तरफ जहां जेल से कैदी भाग जाते हैं, वहीं दूसरी ओर **घटना के लगभग तीन घंटे बाद कंट्रोल रूम और पुलिस अधीक्षक को इसकी सूचना दी जाती है। यह देरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अनदेखी और जिम्मेदारी से बचने की एक स्पष्ट कोशिश मानी जा रही है।
इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि **जेल प्रशासन ने घटना के समय सायरन तक नहीं बजाया। जबकि यह एक आवश्यक प्रक्रिया होती है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सायरन बजा कर पूरे क्षेत्र को सतर्क किया जाए। घटना के चार घंटे बाद सायरन बजाया गया, जो इस बात को दर्शाता है कि जेल प्रशासन पूरे मामले को दबाने की कोशिश में जुटा हुआ था।
जेलर पर गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में जेलर की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध मानी जा रही है। एक तरफ सुरक्षा व्यवस्था ठप, दूसरी ओर सायरन और सूचना में जानबूझकर की गई देरी – यह सब बिना भीतर की मिलीभगत के संभव नहीं लगता। जेलर की सीधी जवाबदेही तय होती है लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की गई है।
जेलर की कार्यप्रणाली पे सवाल उठना लाजमी
कोरबा जेलर पिछले पांच वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जो कि शासन के स्थानांतरण नियमों का उल्लंघन है। लंबे समय तक एक ही जगह बने रहने से भ्रष्टाचार और नेटवर्किंग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। यह लापरवाही या साजिश — जो भी हो — एक सुनियोजित योजना की ओर इशारा करती है।
जनता और प्रतिनिधियों में आक्रोश
इस घटना के बाद **स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश देखा गया है। लोगों का कहना है कि अगर यह हाल जेल की सुरक्षा का है, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। मांग की जा रही है कि जेलर को तत्काल निलंबित कर, उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की जाए। साथ ही जेल अधीक्षक की लंबी पदस्थापना की भी उच्च स्तरीय जांच की मांग उठ रही है।
निष्कर्ष:
कोरबा जिला जेल से कैदियों का फरार होना सिर्फ एक घटना नहीं, पूरे जेल सिस्टम की नाकामी और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। अगर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घटनाएं दोहराई जाएंगी और सिस्टम में बैठे भ्रष्ट अधिकारी जनता की सुरक्षा को और खतरे में डालेंगे।
यह केवल कैदियों की फरारी नहीं, बल्कि जेल प्रशासन की नैतिक और जिम्मेदार विफलता है।
cg24
