केरल उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णयः भारत में फिजियोथेरेपिस्टों के अधिकारों की पुष्टि
केरल उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णयः भारत में फिजियोथेरेपिस्टों के अधिकारों की पुष्टि
भारत में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव डालने वाले एक ऐतिहासिक निर्णय में, केरल उच्च न्यायालय ने रिट याचिका संख्या 41064/2025 में इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) के पक्ष में फैसला सुनाया है। यह याचिका इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (IAPMR) द्वारा दायर की गई थी।
माननीय न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि योग्य फिजियोथेरेपिस्ट विधिसम्मत रूप से अपने नाम के साथ "डॉ." उपसर्ग का उपयोग करने के अधिकार रखते हैं तथा बिना अनावश्यक पेशेवर प्रतिबंधों के स्वतंत्र रूप से अभ्यास करने के लिए अधिकृत हैं। यह निर्णय फिजियोथेरेपी को एक वैज्ञानिक, साक्ष्य-आधारित एवं स्वायत्त स्वास्थ्य पेशे के रूप में सुदृढ़ कानूनी मान्यता प्रदान करता है।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स के अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजीव के. झा ने कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला भारत में फिजियोथेरेपिस्टों की स्वतंत्र पेशेवर पहचान, स्वायत्तता और गरिमा को औपचारिक रूप से मान्यता देता है।
माननीय न्यायालय ने इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (IAPMR) की सभी दलीलों को खारिज कर दिया है।
यह निर्णय देशभर के लाखों फिजियोथेरेपिस्टों एवं फिजियोथेरेपी विद्यार्थियों के लिए एक निर्णायक प्रगति का प्रतीक है। यह फिजियोथेरेपिस्टों की भूमिका को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के रूप में सुदृढ़ करता है, जो रोगों की रोकथाम, उपचार तथा कार्यात्मक पुनर्स्थापन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इस अवसर पर बोलते हुए, प्रो. डॉ. संजीव के. झा ने कहा कि यह निर्णय केवल एक कानूनी सफलता नहीं, बल्कि संपूर्ण फिजियोथेरेपी समुदाय की सामूहिक विजय है। उन्होंने जोर दिया कि इस फैसले से रोगियों की फिजियोथेरेपी सेवाओं तक पहुँच में सुधार होगा, नैतिक एवं स्वतंत्र अभ्यास को बढ़ावा मिलेगा, तथा शिक्षा और अनुसंधान को सुदृढ़ता मिलेगी।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स ने इस निर्णय को भारत में फिजियोथेरेपी के इतिहास में एक परिभाषित मील का पत्थर बताया है, जो वर्षों की सतत वकालत, एकता और पेशेवर ईमानदारी के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से प्राप्त हुआ है।
एसोसिएशन ने NCAHP, देशभर के सभी फिजियोथेरेपिस्टों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों एवं समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने न्याय और पेशेवर मान्यता की इस लड़ाई में एकजुट होकर सहयोग दिया।
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