जोन अध्यक्ष की कुर्सी पर पति, प्रोटोकॉल की खुलेआम धज्जियाँ

जोन अध्यक्ष की कुर्सी पर पति, प्रोटोकॉल की खुलेआम धज्जियाँ

CG 24 News विशेष रिपोर्ट

राजधानी रायपुर में महिला जनप्रतिनिधि के अधिकारों का हनन

जोन अध्यक्ष की कुर्सी पर पति, प्रोटोकॉल की खुलेआम धज्जियाँ

रायपुर | CG 24 News

महिला सशक्तिकरण, 33 प्रतिशत आरक्षण और महिलाओं को नेतृत्व देने की सरकारी घोषणाओं के बीच राजधानी रायपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इन दावों की पोल खोल कर रख दी है। रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक–3 में महिला जोन अध्यक्ष के अधिकारों का खुलेआम हनन और शासकीय प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला उजागर हुआ है।

जोन–3 की निर्वाचित अध्यक्ष श्रीमती साधना साहू हैं, लेकिन जल कार्य समिति की बैठक के दौरान जो तस्वीर सामने आई, वह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बैठक में पूर्व पार्षद एवं अध्यक्ष के पति प्रमोद साहू, जो वर्तमान में किसी भी पद पर नहीं हैं, जोन अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे नजर आए, जबकि महिला अध्यक्ष बगल की कुर्सी पर बैठी रहीं।

प्रोटोकॉल की अनदेखी, वरिष्ठ MIC सदस्य साइड की कुर्सी पर

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जल कार्य समिति के अध्यक्ष एवं MIC सदस्य संतोष साहू, जो प्रोटोकॉल में जोन अध्यक्ष से भी वरिष्ठ माने जाते हैं, उन्हें मुख्य कुर्सी के बजाय साइड में साधारण प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठाया गया। यह दृश्य नगर निगम की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनुशासन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

तस्वीर खुद पूर्व पार्षद ने की जारी

CG 24 News के पास मौजूद तस्वीरें स्वयं प्रमोद साहू द्वारा सोशल मीडिया पर जारी की गई हैं। इन तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बैठक की अध्यक्षता एक गैर-अधिकृत व्यक्ति कर रहा है, जबकि निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि मूक दर्शक बनी हुई हैं।

‘प्रतिनिधि पति’ संस्कृति फिर बेनकाब

नगर निगम और पंचायतों में वर्षों से चली आ रही ‘सरपंच पति–पार्षद पति’ संस्कृति पर शासन-प्रशासन कई बार रोक लगाने के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद राजधानी में इस तरह की घटना का सामने आना यह दर्शाता है कि नियम-कानून का पालन केवल कागजों तक सीमित है।

सूत्रों के अनुसार—

अधिकारियों और ठेकेदारों से बातचीत पूर्व पार्षद प्रमोद साहू ही करते हैं,

वार्डों में ऐसे बोर्ड लगे हैं जिनमें उन्हें अध्यक्ष बताया गया है,

जबकि संवैधानिक रूप से अध्यक्ष उनकी पत्नी हैं।

महिला सशक्तिकरण पर सीधा प्रहार

कानून के जानकारों का कहना है कि यह मामला संविधान, महिला आरक्षण और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। यदि महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति सत्ता का प्रयोग करें, तो यह सीधे तौर पर महिला अधिकारों का अतिक्रमण माना जाएगा।

सवाल जो CG 24 News उठा रहा है

क्या नगर निगम प्रशासन इस मामले पर कार्रवाई करेगा?

क्या शासकीय प्रोटोकॉल तोड़ने वालों पर जिम्मेदारी तय होगी?

और सबसे बड़ा सवाल—

क्या महिला जनप्रतिनिधियों को वास्तव में स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाएगा?

CG 24 News इस पूरे मामले पर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। यह मामला सिर्फ एक कुर्सी या एक बैठक का नहीं, बल्कि महिला सम्मान, संवैधानिक अधिकार और लोकतंत्र की साख से जुड़ा है।

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