सुहागिनों ने सिंदूर खेलकर माँ दुर्गा को दी विदाई
रायपुर। श्री श्री शारदीय दुर्गोत्सव त्रिलोकी मां कालीबाड़ी समिति राजेंद्र नगर स्थित मंदिर परिसर में बुधवार को सिंदुर खेला के साथ माँ दुर्गा को विदा किया गया। सुहागिनों ने सिंदूर खेलकर मां दुर्गा अखण्ड सौभाग्यवती होने का वरदान मांगा। सभी ने आबार एशो माँ के जयकारों के साथ नम आँखों से भावभीनी विदाई दी।
श्री श्री शारदीय दुर्गोत्सव त्रिलोकी मां कालीबाड़ी समिति राजेंद्र नगर की सांस्कृतिक प्रभारी श्रीमती सुचित्रा बर्धन और सचिव श्री विवेक बर्धन ने बताया कि सिंदुर खेला बंगाली हिंदू समाज की एक प्रमुख परंपरा है, जो मां दुर्गा की विदाई से पहले मनाई जाती है। इस परंपरा में मां दुर्गा को बेटी के रूप में देखा जाता है,। मां दुर्गा जब मायके से विदा होकर ससुराल जाती है तो उनकी मांग सिंदुर से सजाई जाती है। इसके बाद सुहागिन स्त्रियां एक-दूसरे को सिंदुर लगाकर शुभकामनाएं देती हैं। मान्यता है कि सुहागिनों को सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है।
मंदिर परिसर में बंगाली समाज के साथ ही अन्य समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में माँ दुर्गा को सिंदूर लगाकर पूजा-अर्चना की एवं एक-दूसरे को भी सिंदूर लगाया। महिलाओं ने पांरपरिक नृत्य और गीत गाकर माँ दुर्गा को विदाई दी। सिंदूर खेला को देवी सिंदूर वरन के नाम से भी जाना जाता है।


