अरुण पन्नालाल के ऊपर सरकार को कड़ा एक्शन लेना चाहिए ।पहलगाम आतंकी हमले में शहीद लोगों के बदले सोशल मीडिया पर प्रसारित की भ्रामक सूची
रायपुर/बसना । पहलगाम आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया । इस हमले में शहीद हुए लोगों के परिजन इस पीड़ा से निकल नहीं पाए । किसी का सुहाग उड़ा,किसी ने अपना बेटा खोया, तो किसी ने अपने पिता को खो दिया ।
वही इस मामले में अरुण पन्नालाल द्वारा सोशल मीडिया एवं अन्य सार्वजनिक प्लेटफार्मों के माध्यम से असत्य,भ्रामक एवं तथ्यहीन मृतकों की सूची का प्रकाशन एवं प्रचार प्रसार किया गया है । सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अरुण पन्नालाल रायपुर मोवा के रहने वाले है और छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के वक्ता है।
बसना विधायक डॉ संपत अग्रवाल ने अरुण पन्नालाल द्वारा की गई इस प्रकार सोशल मीडिया पर धार्मिक उन्माद फैलाने का पुरजोर विरोध प्रकट करते हुए कहा कि अरुण पन्नालाल के ऊपर सरकार को कड़ा एक्शन लेना चाहिए । इस मामले में अमर बंसल ने FIR कराई थी पर अज्ञात कारणों से उस FIR को वापस भी ले लिया।
यह बहुत ही निंदनीय बात है कि अरुण पन्नालाल द्वारा फेसबुक एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जो लिस्ट प्रसारित की उसमें छत्तीसगढ़ रायपुर के शहीद दिनेश मिरानिया का नाम ही नहीं है साथ ही उस लिस्ट में 15 मुसलमानों के नाम है ।जो पूरी तरह से गलत है।

विधायक डॉ अग्रवाल ने कहा कि इससे तो यही प्रतीत होता है कि अरुण पन्नालाल धार्मिक उन्माद फैलाने का कार्य कर रहा है। अरुण पन्नालाल द्वारा किया गया यह कृत्य भी एक तरीके का आतंकवाद है। तभी उसने सोशल मीडिया पर पहलगाम हमले में शहीद लोगो के सही नाम नहीं डाले, उल्टा 15 मुसलमानों के नाम लिस्ट में डाले है ।
विधायक डॉ संपत अग्रवाल ने कहा मै मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अपील करता हूं कि अरुण पन्नालाल जो समाज में अशांति और गलत अफवाह फैला रहा के ऊपर कड़ी कार्यवाही की जाए।
आपको ये भी बता दे कि अरुण पन्नालाल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भारत के न्यूज चैनलों को Godi Media (भाजपा के गोद में बैठी हुई मीडिया) के नाम से संबोधित करते हुए कहा है कि मीडिया गलत प्रचार फैला रही है कि शहीदों को मारने से पहले उनके के नाम पूछे गए थे।
विधायक डॉ अग्रवाल ने इस कथन की घोर निंदा की और कहा कि मीडिया ने वही दिखाया जो पहलगाम आतंकी हमले में घटा और जो प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा बताया गया है। अरुण पन्नालाल द्वारा सोशल मीडिया में किया गया ये कथन बेबुनियाद है। भारत की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मीडिया को बदनाम करने के साजिश है।
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