सेवा तीर्थ राष्ट्र को समर्पित: ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित ऐतिहासिक पहल

सेवा तीर्थ राष्ट्र को समर्पित: ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित ऐतिहासिक पहल

सेवा तीर्थ राष्ट्र को समर्पित: ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित ऐतिहासिक पहल

प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन 1 एवं 2 का उद्घाटन किया; शासन वास्तुकला में परिवर्तनकारी मील का पत्थर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित किया, जो जनसेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि करता है और शासन के मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में “नागरिक देवो भव” की भावना को रेखांकित करता है।

संध्या समय आयोजित सार्वजनिक समारोह में प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में पट्टिका का अनावरण कर कर्तव्य भवन 1 एवं 2 का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया गया। साथ ही, एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर अब ‘सेवा तीर्थ’ (Sevateerth) कर दिया गया है।

यह कार्यक्रम देश की प्रशासनिक संरचना में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो आधुनिक, कुशल, सुलभ एवं नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक भवन नहीं, बल्कि कर्तव्य, करुणा और ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देशवासियों की सेवा के संकल्प और ‘नागरिक देवो भव’ की भावना को साथ लेकर इस पहल को राष्ट्र को समर्पित किया गया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा और जन-जन के कल्याण हेतु समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती रहेगी। प्रधानमंत्री ने प्रशासनिक तंत्र से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस परिसर में प्रवेश करते समय ‘कर्तव्य’ की सर्वोच्च भावना को आत्मसात करें और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम में केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह तथा केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू विशेष रूप से उपस्थित थे।


केन्द्रीय राज्यमंत्री  तोखन साहू का वक्तव्य

इस अवसर पर  तोखन साहू ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ भारत के प्रशासनिक शासन ढांचे में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल एक आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें संस्थागत क्षमता को मजबूत करती हैं और उत्तरदायी एवं जन-उन्मुख शासन की अवधारणा को सुदृढ़ करती हैं, जो विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

श्री साहू ने उल्लेख किया कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक की इमारतें औपनिवेशिक काल में शाही सत्ता के प्रतीक के रूप में निर्मित की गई थीं, जबकि ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ नए भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप एक आधुनिक और नागरिक-प्रथम शासन ढांचे का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक परिसरों का नाम ‘कर्तव्य भवन’ रखना केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त, अपनी पहचान वाले स्वतंत्र भारत की वैचारिक अभिव्यक्ति है।

प्रधानमंत्री के ‘कर्तव्य’ संबंधी संदेश को स्मरण करते हुए श्री साहू ने कहा कि कर्तव्य वह शक्ति है जो राष्ट्रीय प्रयासों को सुदृढ़ करती है, चुनौतियों का समाधान करती है और विकसित भारत के प्रति विश्वास को मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य में समानता, सद्भाव और “सबका साथ, सबका विकास” की समावेशी भावना निहित है।

उन्होंने सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे ‘नागरिक देवो भव’ की भावना को आत्मसात करते हुए सेवा तीर्थ और नए परिसरों में प्रवेश करें तथा आम नागरिक के कल्याण के लिए नवीनीकृत प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें।

श्री साहू ने अपने संसदीय क्षेत्र बिलासपुर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विश्वास और आशीर्वाद के कारण ही उन्हें इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने अपने परिवारजनों के प्रति भी आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके संस्कार और सहयोग ने उन्हें सदैव जनसेवा के मार्ग पर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी है।

उन्होंने कहा,
“यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसेवा और कर्तव्य के संकल्प का सजीव प्रतीक है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सेवा तीर्थ’ आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।”

‘सेवा तीर्थ’ को सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केन्द्रित प्रशासन की दिशा में एक नई कार्य-संस्कृति के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है, जो विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।