कोण्डागांव मक्का प्लांट तनाव के लिए सरकार जिम्मेदार - कांग्रेस

कोण्डागांव मक्का प्लांट तनाव के लिए सरकार जिम्मेदार - कांग्रेस
कोण्डागांव मक्का प्लांट तनाव के लिए सरकार जिम्मेदार - कांग्रेस
 
  • सरकार के भ्रष्टाचार के कारण औद्योगिक इकाई बेलगाम
  • जनता का सरकार पर से भरोसा खत्म, बगावत को मजबूर

रायपुर/13 फरवरी 2026। कोंडागांव के कोकोड़ी स्थित मक्का प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों के प्रदर्शन के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि इस सरकार की अकर्मण्यता के चलते ही जनता का प्रशासन पर भरोसा खत्म हो रहा है, ग्रामीण पिछले 1 साल से सैकड़ों शिकायत कर चुके थे, दर्जनों बार प्रदर्शन हुए लेकिन सरकार सोयी रही। पर्यावरण प्रदूषण के नियमों का पालन कहीं पर नहीं हो रहा है, सरकारी विभाग और निगरानी समितियां केवल कागजों पर है, औद्योगिक अपशिष्ट और प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुका है, केवल हवा ही बदबूदार नहीं उद्योगों से निकलने वाले ठोस और तरल अपशिष्ट से खेत खराब हो रहे हैं, नदी, तालाब और पेयजल के स्रोत दूषित हो रहे हैं, आम जनता का जीना मुश्किल हो गया है। बलौदाबाजार, कवर्धा, बलरामपुर, सूरजपुर, तमनार के बाद कोण्डागांव में जनता बगावत को मजबूर हुई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सत्ता के संरक्षण में उद्योगों में अपशिष्ट प्रबंधन में घोर लापरवाही बरती जा रही है, महीनों तक ना पर्यावरण ऑडिट किए जा रहे हैं, ना निरीक्षण हो रहा है, और ना ही पीड़ितों और प्रभावितों के किसी शिकायत पर कोई कार्रवाई हो रही है, भोले-भाले ग्रामीणों को विद्रोही बनने पर मजबूर कर रही है यह सरकार, जानबूझकर वर्ग संघर्ष की स्थिति निर्मित की जा रही है। सरकार और प्रशासन पर भरोसा खत्म हो रहा है, इसलिए हिंसक प्रतिक्रिया सामने आ रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार के जनविरोधी, उद्योग परस्त नीतियों के चलते पूरे प्रदेश में जन आक्रोश चरम पर पहुंच चुका है, बैलाडीला के किरंदुल लौह अयस्क खदानों से निकलने वाले अवशेष से दंतेवाड़ा जिले में हजारों एकड़ कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। सबरी नदी और मदानी नाले का पूरा पानी अपने निजी उद्योगपतियों को बेच दिया है, पेयजल तक दूषित हो रहा है। भाजपा की सरकार में संसाधनों के असंतुलित दोहन और औद्योगिक अपशिष्ट के चलते जमीन, हवा और पानी जहर बन चुका है। ठोस और तरल औद्योगिक कचरे के सुरक्षित निपटारे के लिए तय प्रक्रिया का कहीं पर भी पालन नहीं हो रहा है जिसके चलते गंभीर बीमारियां फैल रही है। खेती करना मुश्किल हो चुका है। पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन इस सरकार में हो रहा है। भाजपा सरकार की औद्योगिक नीतियों के खिलाफ पूरे प्रदेश में आक्रोश है। सरकार प्रदूषण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ और ग्रामीणों की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करें।