*गोदावरी इस्पात के श्रमिकों के परिवार को मिले 25 लाख मुआवजा - सुशील सन्नी अग्रवाल*

*गोदावरी इस्पात के श्रमिकों के परिवार को मिले 25 लाख मुआवजा - सुशील सन्नी अग्रवाल*

*गोदावरी इस्पात के श्रमिकों के परिवार को मिले 25 लाख मुआवजा - सुशील सन्नी अग्रवाल*

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष ने गोदावरी इस्पात में निर्माणाधीन ढांचा के गिरने के कारण हुए 6 मजदूरों कि मौत और 7 मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं उन परिवारों को संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मजदूर साथियों के परिवार को 25 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने तथा गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को ठीक होने तक इलाज कराने के लिए कंपनी प्रबंधन से मांग किये हैं। 

श्री अग्रवाल ने मजदूरों की मौत पर सरकार और श्रम विभाग पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा की यह सरकार मजदूर विरोधी हैं, मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना इनकी सोच नहीं है। श्री अग्रवाल ने कहा कि श्रम विभाग के इंडस्ट्री हेल्थ एवं सेफ्टी विभाग के अधिकारी फैक्ट्री में सुरक्षा जांच करने की जगह अपनी जेब का वजन जांच करने जाते हैं, आज इनके कारण रायपुर ही नहीं पूरे छत्तीसगढ़ में इंडस्ट्रियों में मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है, जो मशीनरी पुराने हो चुके है उन्हें भी इंडस्ट्री में उपयोग किया जा रहा है जिनके कारण आज इतना बड़ा हादसा हुआ है और 6 परिवार बेसहारा हो गया है। 

श्री अग्रवाल ने इस बात को संज्ञान में लाते हुए कहा कि श्रम विभाग के अधिकारी लाइसेंस के नाम पर हज़ारों रुपए लेकर बिना जांच किए गलत तरीके से लाइसेंस मुहैया करा रहे हैं जिसके कारण फैक्ट्री संचालकों का मनोबल बढ़ा हुआ है और मजदूर मौत के मुंह में समा रहे हैं। 

भाजपा की इस सरकार में रजत जयंती वर्ष के नाम पर मजदूरों के लिए कार्यक्रम कराने के लिए करोड़ों रुपए का खर्चा तो कर रही है लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं, श्रम विभाग के अधिकारी केवल खाना पूर्ति का काम कर रहे हैं।

जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल जी की सरकार थी तब मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इंडस्ट्री के ऊपर सख्त कार्यवाही किया जाता था। श्रम विभाग के अधिकारी उद्योगों में सुरक्षा की नियमित जांच करते थे, यह सरकार तो केवल पेपर पर कार्य कर रही है। मोदी की गारंटी के नाम पर झूठे वादे कर सत्ता में आ तो गए हैं किंतु कांग्रेस की सरकार के जैसा जनहित और श्रमिक हित में कार्य नहीं कर रहे हैं।