भारतीय जनता पार्टी ने ओवैसी की AIMIM पार्टी से किया गठबंधन

भारतीय जनता पार्टी ने ओवैसी की AIMIM पार्टी से किया गठबंधन

*अकोट नगर परिषद में भाजपा-AIMIM गठबंधन से सियासी हलचल*

अकोला (महाराष्ट्र)

सत्ता हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर अपने पुराने राजनीतिक तेवरों से अलग राह चुनते हुए अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ गठबंधन कर लिया है। नगर परिषद चुनाव में स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद भाजपा द्वारा उठाया गया यह कदम प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी तीखी बहस का विषय बन गया है।

जिस असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM को भाजपा के नेता लंबे समय से “विभाजनकारी राजनीति” और “मुस्लिम तुष्टिकरण” का प्रतीक बताते रहे हैं, उसी पार्टी के साथ एक छोटी सी नगर परिषद में मेयर पद हासिल करने के लिए गठबंधन करना विपक्ष को भाजपा पर सवाल उठाने का बड़ा मौका दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की सत्ता लोलुपता के रूप में देखा जा सकता है।

भाजपा के इस कदम को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि यह गठबंधन इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में वैचारिक विरोध केवल मंचों और भाषणों तक सीमित है, जबकि सत्ता की जरूरत पड़ते ही वही विरोधी दल स्वीकार्य हो जाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा ने सत्ता के लिए वैचारिक विरोध को पीछे छोड़ा हो। 

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी के साथ सरकार बनाई थी,

उत्तर प्रदेश में भाजपा ने कभी मायावती की बहुजन समाज पार्टी के साथ भी राजनीतिक समझ बनाई थी,

और अब अकोट नगर परिषद में AIMIM के साथ गठबंधन उसी राजनीतिक परंपरा की कड़ी माना जा रहा है।

 महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अपनाते हुए भाजपा-AIMIM गठबंधन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। मुख्यमंत्री का यह रुख पार्टी के भीतर भी मतभेद और असहजता की ओर इशारा करता है। माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर सत्ता की राजनीति और प्रदेश नेतृत्व की नीति के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस गठबंधन को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि जो पार्टी देशभर में AIMIM पर हमलावर रहती है, वही सत्ता के लिए उसी पार्टी का सहारा ले रही है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा की राजनीति अब “सिद्धांत नहीं, केवल सत्ता” के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। अकोट नगर परिषद का यह गठबंधन भले ही स्थानीय राजनीति का हिस्सा बताया जा रहा हो, लेकिन इसके दूरगामी राजनीतिक संदेश हैं। यह घटनाक्रम एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या भारतीय राजनीति में वैचारिक विरोध वास्तव में क्या दिखावा है या फिर सत्ता के सामने सब कुछ गौण हो जाता है |