उपमुख्यमंत्री अरुण साव को सौंपा ज्ञापन-एनआईटी चौपाटी में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही, राजनीतिक दबाव में की जा रही अमानवीय कार्यवाही के विरुद्ध शिकायत।
ज्ञापन
सेवा में,
माननीय अरुण साव जी,
मंत्री नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग,
छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर
विषय: एनआईटी चौपाटी में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही, राजनीतिक दबाव में की जा रही अमानवीय कार्यवाही के विरुद्ध शिकायत।
मान्यवर,
रायपुर नगर निगम क्षेत्र में हाल ही में चौपाटी संचालकों को अचानक नोटिस जारी कर निर्धारित समय में दुकानें हटाने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में निम्न गंभीर बिंदुओं एवं शिकायतों पर आपका ध्यान आकृष्ट करना आवश्यक है—
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1. अधिकारियों की गंभीर लापरवाही
चौपाटी का डिज़ाइन, ड्रॉइंग और अनुमोदन नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ही स्वीकृत किया गया था।
अगर संरचना अवैध थी, तो —
डिज़ाइन स्वीकृति किस आधार पर दी गई?
निर्माण और संचालन वर्षों तक बिना आपत्ति कैसे चलता रहा?
आज अचानक इसे अवैध बताना स्पष्ट रूप से प्रशासन की अपनी गलती और लापरवाही छिपाने का प्रयास प्रतीत होता है।
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2. राजनीतिक दबाव में कार्यवाही
सूत्रों के अनुसार क्षेत्रीय विधायक के दबाव में नगर निगम और जोन स्तर के अधिकारी जल्दबाज़ी में कार्रवाई कर रहे हैं।
बिना कारण दर्ज किए,
बिना सुनवाई दिए,
और बिना वैध प्रक्रिया अपनाए
रोज़गार छीनने जैसी कार्रवाई करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील है।
प्रशासन का जाना–पहचाना सिद्धांत है कि रोज़गार छीनना अंतिम विकल्प होता है, पहला नहीं।
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3. दोहरा मापदंड — बूढ़ापारा और अन्य क्षेत्रों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
स्कूल–कॉलेज की आड़ में चौपाटी को हटाने का तर्क दिया जा रहा है।
यदि यह मानदंड है, तो—
बूढ़ापारा चौपाटी, जहाँ गर्ल्स स्कूल और कई शिक्षण संस्थान मौजूद हैं,
वहाँ ऐसी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
यह स्पष्ट दर्शाता है कि नियमों की आड़ में चुनिंदा क्षेत्रों पर राजनीतिक कारणों से दबाव बनाया जा रहा है।
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4. गुड़ियारी क्षेत्र में 24 करोड़ की पाइपलाइन—शासकीय धन का दुरुपयोग
रायपुर पश्चिम विधायक द्वारा गुड़ियारी क्षेत्र में बिना पानी की उपलब्धता और स्रोत की जांच किए 24 करोड़ रुपये की पाइपलाइन बिछा दी गई।
आज भी उस लाइन में पानी नहीं पहुँच रहा।
यह—
शासकीय धन का स्पष्ट दुरुपयोग,
बिना DPR और बिना फिज़िबिलिटी के काम,
और जनता को धोखे में रखने का गंभीर मामला है।
इस परियोजना की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
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5. असंवेदनशील अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई की मांग
नगरीय प्रशासन और नगर निगम रायपुर में बैठे अधिकारी और कुछ जनप्रतिनिधि—
जनता के हित के खिलाफ,
मनमाने तरीके से,
दबाव में,
और गैर–जिम्मेदाराना रवैये के साथ
कार्य कर रहे हैं।
हम मांग करते हैं कि—
1. चौपाटी विवाद की जांच हेतु उच्चस्तरीय समिति बने।
2. जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
3. राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जांच हो।
4. भविष्य की कार्यवाहियों के लिए स्पष्ट नीति प्रकाशित की जाए।
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6. समाधान न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी
यदि इन मुद्दों पर 7 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई और उत्तर नहीं दिया गया—
तो हम मजबूर होकर लोकतांत्रिक तरीके से
मुख्यमंत्री आवास घेराव करने पर बाध्य होंगे।
हम आशा करते हैं कि आप इस गंभीर विषय को प्राथमिकता देंगे और न्यायसंगत निर्णय सुनिश्चित करेंगे।
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