अविश्वास प्रस्ताव पर अजय चंद्राकर का विपक्ष पर तीखा हमला
कांग्रेस के आरोप पत्र में एक भी ठोस मुद्दा नहीं, कांग्रेस पहले अपना पांच साल का हिसाब दे - अजय चंद्राकर
शराब नीति, गौठान, रीपा, आवास, गोबर खरीदी योजना और आर्थिक प्रबंधन को लेकर कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना
छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार के पक्ष में प्रभावी ढंग से अपनी बात रखते हुए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को तथ्यहीन और राजनीतिक दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत 151 पृष्ठों का आरोप पत्र 136 बिंदुओं से भरा हुआ है, लेकिन उसमें कोई ठोस विषय शामिल नहीं है। एक ही आरोप को बार-बार दोहराकर उसे बड़ा दिखाने का प्रयास किया गया है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि हमने अपने राजनीतिक जीवन में कई अविश्वास प्रस्ताव और आरोप पत्र देखे हैं, लेकिन इतना कमजोर और आधारहीन दस्तावेज पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने विपक्ष से आग्रह करते हुए कहा कि इस आरोप पत्र को वापस ले लेना चाहिए, क्योंकि इसका कोई राजनीतिक या तथ्यात्मक महत्व नहीं है।
अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने एक फिल्मी संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को, सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने पांच वर्षों के कार्यकाल का आत्ममंथन करना चाहिए।
वरिष्ठ विधायक श्री चंद्राकर ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर उठे विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि अंबिकापुर में एक बयान दिया गया कि आगामी चुनाव टी.एस. सिंहदेव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, लेकिन रायपुर आते-आते वही बयान बदल गया। उन्होंने इसे कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व संकट का उदाहरण बताया।
श्री चंद्राकर ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि नवजोत कौर सिद्धू द्वारा दिल्ली में 500 करोड़ रुपये की अटैची की बात कही गई थी, वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी एक हजार करोड़ रुपये चंदा जुटाने संबंधी बयान दिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भी पिछली कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता जनसेवा नहीं, बल्कि शराब कारोबार रही। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी सरकार की चिंता आम जनता की नहीं बल्कि शराब व्यवस्था की थी। गोधन न्याय योजना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना में सेस की राशि के रूप में लगभग 2713 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। उन्होंने कहा कि पैरादान की ढुलाई में भी सेस की राशि से 53 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का उदाहरण है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार का उद्देश्य प्रदेश की सेवा नहीं बल्कि योजनाओं के नाम पर धन खर्च करना और व्यर्थ ही खर्च करना था। उन्होंने गोबर पेंट योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने आदेश जारी किया था कि सरकारी भवनों की पुताई गोबर पेंट से होगी, लेकिन आज तक ऐसा कोई भवन नहीं दिखाया जा सका।
राम वन गमन पर्यटन परियोजना का जिक्र करते हुए विधायक श्री चंद्राकर ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस विषय में भी पूर्व सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई गई। धमतरी में सप्तऋषियों की प्रतिमाओं पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन गुणवत्ता और उद्देश्य दोनों पर सवाल खड़े हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि रामायण आधारित कार्यक्रमों और आयोजनों के नाम पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए गए, जिनकी पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न हैं।
विधायक श्री चंद्राकर ने कहा कि गोबर से जुड़े विभिन्न प्रकल्पों में 246 करोड़ रुपये व्यय हुए, लेकिन उसका अपेक्षित लाभ प्रदेश को नहीं मिला। रीपा (रीपा-रूरल इंडस्ट्रियल पार्क) योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 300 पार्क बनाने का लक्ष्य था, लेकिन अंतिम बजट में 600 करोड़ रुपये का प्रावधान करने के बावजूद योजना धरातल पर सफल नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार आदर्श गौठान की स्पष्ट परिभाषा तक तय नहीं कर पाई।
राजीव गांधी युवा मितान क्लब योजना पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग 140 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन उसका सामाजिक और आर्थिक परिणाम प्रदेश के सामने नहीं आया। उन्होंने उद्योगों को बिजली शुल्क में दी गई छूट का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष से पूछा कि जिन उद्योग समूहों के करीब 10 हजार करोड़ रुपये के विद्युत शुल्क माफ किए गए, उनके नाम सदन में बताए जाएं।
युवाओं और खेल के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि पांच वर्षों में बेरोजगारी की स्पष्ट परिभाषा तक तय नहीं की जा सकी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि छह बार ओलंपिक जैसे आयोजन कराने के दावे किए गए, जबकि धरातल पर युवाओं के लिए ठोस परिणाम दिखाई नहीं दिए। उन्होंने वर्ष 2023 के आर्थिक एवं सामाजिक सर्वेक्षण तथा संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि उस पर 12 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन उसका उपयोग क्या हुआ, इसका जवाब आज तक नहीं मिला। उन्होंने क्वांटिफाइबल डाटा आयोग की रिपोर्ट का भी उल्लेख करते हुए पूछा कि उसका क्या हुआ और उसका कार्यकाल बार-बार क्यों बढ़ाया गया।
समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर श्री चंद्राकर ने कहा कि यह कोई नया विषय नहीं है। संविधान सभा में स्वयं बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इसकी आवश्यकता पर बल दिया था। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि जिन राज्यों में उनकी सरकारें हैं, वहां इस विषय पर उनका क्या रुख है। उन्होंने तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कर्मचारियों को समय पर वेतन देने तक की स्थिति नहीं है, ऐसे में कांग्रेस को आर्थिक प्रबंधन पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है।
प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए श्री चंद्राकर ने कहा कि तत्कालीन मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आवास योजना को लेकर अपनी असहमति सार्वजनिक रूप से व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने 18 लाख आवासों की स्वीकृति देकर गरीबों को उनका अधिकार लौटाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से लगातार सहायता दी जा रही है और केंद्र तथा राज्य सरकार मिलकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं।
मत्स्य पालन के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ विधायक ने कहा कि प्रधानमंत्री की नीली क्रांति योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने 606 करोड़ रुपये का फिश सीड उत्पादन कर देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है।
अपने संबोधन के अंत में अजय चंद्राकर ने कहा कि विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि कांग्रेस के अपने पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल पर प्रश्नचिह्न बनकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण के एजेंडे पर आगे बढ़ रही है, जबकि विपक्ष के पास तथ्य आधारित आलोचना के बजाय केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ही शेष रह गए हैं।

