छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार जवाब दे-जनता की समस्याएँ सुनेगा कौन? सत्ता में भाजपा सरकार, लेकिन जनता की समस्याओं का समाधान कहाँ? - विकास उपाध्याय

छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार जवाब दे-जनता की समस्याएँ सुनेगा कौन?  सत्ता में भाजपा सरकार, लेकिन जनता की समस्याओं का समाधान कहाँ? - विकास उपाध्याय

भाजपा सरकार में जब सांसदों की ही सुनवाई नहीं, तो आम जनता की फरियाद कौन सुनेगा? छत्तीसगढ़ सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में जब जनप्रतिनिधियों की आवाज अनसुनी, तो जनता को न्याय कैसे मिलेगा?

छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार जवाब दे-जनता की समस्याएँ सुनेगा कौन?

सत्ता में भाजपा सरकार, लेकिन जनता की समस्याओं का समाधान कहाँ? - विकास उपाध्याय

रायपुर (छत्तीसगढ़) दिनांक 27.10.2026। पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी के शासन में यदि सांसदों की समस्याओं और मांगों पर सुनवाई नहीं हो रही है, तो आम जनता की पीड़ा और शिकायतों का क्या हाल होगा? यह सवाल प्रदेश की शासन व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के प्रति सरकार के रवैये पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उपाध्याय ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी की छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति इरानी के सामने पूर्व विधायक-सांसद के बाद वर्तमान सांसदों ने मंत्रियों के खिलाफ शिकायतों का पिटारा खोल दिया। छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी की सरकार में उनके ही पार्टी के सांसदों ने आरोप लगाया है कि सत्ता काबिज मंत्री ही उनकी सिफारिशें नहीं सुन रहे। कोई भी काम इनके कहने पर नहीं किया जाता, सांसदों का यह भी कहना है कि भाजपा कार्यकर्ता ही सांसदों से कह दे रहे हैं कि आप सिर्फ पत्र लिख दीजिए, काम तो हम करवा लेंगे। विकास उपाध्याय ने कहा कि इस प्रकार से छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी अपनी सत्ता चला रही है और यहाँ की भोली भाली जनता इस आस में है कि सरकार हमारा काम कर रही है, हमारा सुन रही है जबकि वास्तविक स्थिति अब सभी के सामने आ चुकी है और जनता भली-भाँति अपना जवाब समय आने पर देगी।

विकास उपाध्याय ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की आवाज को गंभीरता से सुनना और जनता की समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। जब निर्वाचित सांसदों को ही अपनी बात रखने और समस्याओं का निराकरण कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हो, तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, बिगड़ती कानून व्यवस्था और रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर जवाब चाहती है। आम आदमी अपनी शिकायत लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता है, लेकिन यदि उसकी आवाज शासन तक नहीं पहुंचती, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता है।

विकास उपाध्याय ने सवाल उठाया कि क्या छत्तीसगढ़ में सरकार केवल सत्ता चलाने के लिए है या जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए भी? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जनप्रतिनिधियों की मांगों और जनता की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि समस्याओं का ठोस समाधान चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का अहंकार नहीं, जनसेवा का भाव सर्वोपरि होना चाहिए। सरकार को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

सांसदों की आवाज यदि शासन तक नहीं पहुंच रही है, तो आम जनता की पुकार का क्या होगा? यह सवाल आज छत्तीसगढ़ सरकार को जनता के सामने जवाबदेह बनने के लिए मजबूर करता है। जनहित के मुद्दों की अनदेखी बंद होनी चाहिए और सरकार को जवाबदेही के साथ जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।