छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन द्वारा नमक निविदा में सिंडिकेट और कार्टेलबाजी से राजस्व को करोड़ों की चपत

छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन द्वारा नमक निविदा में सिंडिकेट और कार्टेलबाजी से राजस्व को करोड़ों की चपत

छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन द्वारा नमक निविदा में सिंडिकेट और कार्टेलबाजी से राजस्व को करोड़ों की चपत—
 पात्रता शर्तों की उच्चस्तरीय जांच एवं समीक्षा की मांग - कन्हैया

रायपुर ।छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन द्वारा नमक की आपूर्ति हेतु जारी/प्रस्तावित निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमित्ताओं, कार्टेल/सिंडिकेट के माध्यम से एकाधिकार स्थापित करने और शासन को भारी राजस्व हानि पहुँचाए जाने का मामला उठाया है। उन्होंने इस संबंध में जारी निविदा शर्तों की व्यवहारिक एवं प्रतिस्पर्धात्मक समीक्षा करते हुए उच्चस्तरीय (सीबीआई/ईडी) जांच की मांग की है।
       उन्होंने कहा कि सिंडिकेट और कार्टेल के जरिए पिछले कई वर्षों से एक बाहरी (मुंबई के) उद्योगपति द्वारा मैन्युफैक्चरिंग सिंडिकेट/कार्टेल बनाकर गुजरात और राजस्थान की रिफाइनरियों के माध्यम से टेंडर प्राप्त किए जा रहे हैं। आरोप है कि अलग-अलग कंप्यूटरों के जरिए एक ही स्थान से रेट डलवाकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे हर साल राज्य शासन को 50 से 60 करोड़ रुपये प्रति वर्ष राजस्व की हानि हो रही है।
     श्री अग्रवाल ने कहा कि बाजार में रेक के जरिए नमक काफी कम दरों पर उपलब्ध कराया जा सकता है, लेकिन कथित सिंडिकेट द्वारा इसे ऊंचे दामों पर राज्य को आपूर्ति किया जा रहा है। नमक सप्लाई के लिए अन्य टेंडरों की तरह शर्तों का खेल खेलाजा रहा है । 'सेल्फ-मैन्युफैक्चरिंग' और 'बीआईएस/आईएसआई' शर्तों की अनिवार्यता: निविदा में 'सेल्फ-मैन्युफैक्चरिंग' (स्वयं निर्माता) और 'बीआईएस एवं आईएसआई मार्क' की एक साथ सख्त अनिवार्यता के कारण कई सक्षम आपूर्तिकर्ता प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाते हैं। इससे प्रतिस्पर्धा का दायरा सीमित हो जाता है और चुनिंदा समूहों को फायदा पहुँचता है।
      प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता कि मांग करते हुए कहा कि निविदा की इन शर्तों में आवश्यक संशोधन किया जाए। सेल्फ-मैन्युफैक्चरिंग की अनिवार्यता हटाने और स्वतंत्र/अधिकृत प्रयोगशालाओं से परीक्षण रिपोर्ट एवं खाद्य सुरक्षा मानकों को मुख्य पात्रता बनाने से अधिक से अधिक योग्य आपूर्तिकर्ता भाग ले सकेंगे। इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, शासन के धन की बचत होगी और जनता को उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्तायुक्त नमक मिल सकेगा।
कन्हैया अग्रवाल ने शासन से आग्रह किया है कि संपूर्ण मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा निविदा की शर्तों की समीक्षा कर उन्हें अधिक पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी बनाया जाए, ताकि राज्य के राजस्व की रक्षा हो सके।