कांग्रेस नेता सुभाष धुप्पड़ पर विस्थापित परिवार का फायदा लेने का आरोप

 *विशेष खबर*

*रायपुर में विस्थापित परिवार के सदस्य होने का दावा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत*

रायपुर के ईदगाह भाटा निवासी बसंत गिरेपुंजे ने तहसीलदार नजूल रायपुर के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि सुभाष धुप्पड़ नामक व्यक्ति ने विस्थापित परिवार का सदस्य होने का झूठा दावा करके शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण किया है और उसका उपयोग व्यवसायिक प्रयोजनों के लिए कर रहा है।

*आरोप और दावे*

बसंत गिरेपुंजे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि सुभाष धुप्पड़ का जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ था, इसलिए वह विस्थापित परिवार का सदस्य नहीं हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि सुभाष धुप्पड़ ने अपने पिता अर्जुन दास के नाम पर प्राप्त क्षतिपूर्ति राशि के आधार पर शासकीय भूमि का आबंटन प्राप्त किया है, जो अवैध है।

*उच्च न्यायालय का आदेश*

बसंत गिरेपुंजे ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि उन्होंने इस मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने कलेक्टर रायपुर को इस मामले में जांच करने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

*कार्रवाई की मांग*

बसंत गिरेपुंजे ने अपनी शिकायत में मांग की है कि सुभाष धुप्पड़ के खिलाफ जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके द्वारा किए गए अवैध निर्माण को तोड़ा जाए और शासकीय भूमि का पट्टा रद्द किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि इस मामले में उचित कार्रवाई करने के लिए कलेक्टर रायपुर को निर्देश दिया जाए।

*छत्तीसगढ़ शासन की कार्रवाई पर सवाल*

छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया है, जिसमें आयुक्त रायपुर संभाग रायपुर को एक प्रकरण में मार्गदर्शन प्रदान किया गया है। यह प्रकरण बसंत गिरपुंजे द्वारा सुभाष धुप्पड़ के खिलाफ दायर की गई शिकायत से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सुभाष धुप्पड़ ने विस्थापित परिवार का सदस्य होने का झूठा दावा करके शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण किया है।

*पत्र के मुख्य बिंदु*

छत्तीसगढ़ शासन के पत्र में उल्लेख किया गया है कि शासकीय भूमि के आबंटन/व्यवस्थापन/फ्रीहोल्ड के विषय में कोई आपत्ति/शिकायत प्राप्त होती है, तो संभागीय आयुक्त द्वारा सुनवाई की जा सकेगी। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता के शिकायत में उल्लेखित तथ्यों का परीक्षण कर नियमानुसार प्रकरण का निराकरण किया जाना सुनिश्चित करें।

*तहसीलदार नजूल के निष्कर्ष*

तहसीलदार नजूल के निष्कर्ष में उल्लेख किया गया है कि अनावेदक सुभाष धुप्पड़ द्वारा कब्जे की पुष्टि हेतु कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह प्रमाणित हो कि उक्त प्रावधानित दिनांक के पूर्व अनावेदक का प्रश्नाधीन भूमि पर कब्जा है। निष्कर्ष में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनावेदक को प्रश्नाधीन भूमि का पट्टा उक्त प्रावधान की कंडिका (i) एवं (ii) के विपरीत प्रदाय किया जाना प्रतीत होता है।

*अगली कार्रवाई*

छत्तीसगढ़ शासन के पत्र के अनुसार अब इस प्रकरण का निर्णय संभागीय आयुक्त द्वारा किया जाना उचित होगा। देखना यह है कि आगे इस प्रकरण में क्या कार्रवाई होती है ? और सुभाष धुप्पड़ के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर  क्या फैसला आता है ?