उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद जी ने किया नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ नेशनल लोक अदालत में 01 लाख 53 हजार 296 प्रकरणों का निराकरण
लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए माननीय न्यायमूर्ति श्री अमितेन्द्र किशोर प्रसाद जी ने कहा कि यह एक ऐसा मंच है, जहाँ ऐसे विवादों का समाधान किया जाता है, जिनमें आपसी समझौते की संभावना होती है। न्यायालयीन प्रक्रिया से हटकर, आपसी सहमति और सौहार्द के साथ मामलों का निपटारा करना लोक अदालत का मूल उद्देश्य है। मीडिएशन के पश्चात लोक अदालत विवादों के समाधान की एक प्रभावी व्यवस्था है, जहाँ पक्षकार मिल-जुलकर अपने विवादों का समाधान कर सकते हैं। माननीय न्यायमूर्ति ने कहा कि पारंपरिक न्यायालयों में पक्षकार, अधिवक्ता और न्यायालय के बीच प्रक्रिया चलती है, जबकि लोक अदालत में पक्षकार स्वयं अपने विवाद का समाधान करने का निर्णय लेते हैं। यह केवल समझौता नहीं, बल्कि विश्वास और सहमति का परिणाम होता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी सदैव यही कोशिश रहती है कि बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझें और समझौते में किसी प्रकार की कानूनी बाधा न आए। कानून की व्याख्या न्यायालय में होती रहेगी, किंतु लोक अदालत वह मंच है जहाँ पक्षकार स्वतंत्र रूप से, बिना किसी दबाव के, स्वयं निर्णय ले सकते हैं।
माननीय न्यायमूर्ति जी ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत आयोजित प्रत्येक कार्यक्रम हम सभी के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे आयोजनों में जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक होती है। दैनिक न्यायिक कार्यों के अतिरिक्त जब लोक अदालत अथवा विधिक सेवा से संबंधित कोई भी कार्यक्रम आयोजित होता है, तो उसमें सम्मिलित होना हमारे लिए गौरव का विषय होता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत जैसे आयोजनों के माध्यम से आम नागरिकों, प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से एक-दूसरे से संवाद करने का अवसर प्राप्त होता है। इससे सद्भावना और विश्वास का वातावरण निर्मित होता है। माननीय न्यायमूर्ति जी द्वारा इस अवसर पर न्यायालय का निरीक्षण कर प्रकरणों के निराकरण की जानकारी भी ली गई। कार्यक्रम में रजिस्ट्रार विजलेंस छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बिलासपुर से मंसूर अहमद, प्रधान जिला एंव सत्र न्यायाधीश उत्तर बस्तर कांकेर संजीव कुमार टामक, कुटुम्ब न्यायालय कांकेर के न्यायाधीश रमाशंकर प्रसाद, कलेक्टर कांकेर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर, अध्यक्ष बार एसोसिएशन कांकेर धनराज जैन, जिला एवं अतिरिक्त न्यायाधीश श्रीमती विभा पाण्डेय, मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट भास्कर मिश्र, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शांति प्रभु जैन, न्यायायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी सुश्री सुनिती नेताम, एसडीएम अरूण वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.एस. ठाकुर एवं टी.पी. देव एवं अन्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट और अधिवक्तागण बड़ी संख्या में मौजूद थे।
खण्डपीठ क्रमांक 01 प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तर बस्तर कांकेर संजीव कुमार टामक, खण्डपीठ क्रमांक 02 कुटूम्ब न्यायाधीश कांकेर रमाशंकर प्रसाद, खण्डपीठ क्रमांक 03 प्रथम अपर एवं जिला सत्र न्यायाधीश श्रीमती विभा पाण्डेय, खण्डपीठ क्रमांक 04 मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भास्कर मिश्र, खण्डपीठ क्रमांक 05 न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी कांकेर सुश्री सुनीति नेताम तथा तालुका भानुप्रतापपुर में खण्डपीठ क्रमांक 01 जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश भानुप्रतापपुर दीपक के. गुप्ता, खण्डपीठ क्रमांक 02 सिविल जज सीनियर डिवीजन गुलपन राम यादव और तालुका पखांजूर में खण्डपीठ क्रमांक 01 जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश पखांजूर विजय कुमार मिंज एवं खण्डपीठ क्रमांक 02 न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी पखांजूर ध्रुवराज ग्वाल की अध्यक्षता में खण्डपीठ का गठन किया गया था। इसी प्रकार राजस्व न्यायालय में 01 खण्डपीठ का गठन किया गया, जिसमें राजस्व प्रकरणो का निराकरण किया गया।
नेशनल लोक अदालत के माध्यम से 3925 लंबित प्रकरणों में 3456 प्रकरण निराकृत किया गया, जिसमें कुल अवार्ड राशि 04 करोड़ 85 लाख 28 हजार 844 रूपए पारित किया गया। प्रिलिटिगेशन प्रकरणों जैसे- बैंक वसूली, विद्युत एवं जलकर, टेलीफोन में कुल 01 लाख 49 हजार 840 रूपए मामले पेश किए गए, जिसमें सभी प्रकरण निराकृत हुए एवं समझौता की गई राशि 34 लाख 31 हजार 533 रूपए वसूल की गई है। नेशनल लोक अदालत के माध्यम से न्याय पालिका द्वारा आम नागरिको को त्वरित, सरल एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।
क्रमांक/1324/सुरेन्द्र
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