वायरल वीडियो में मोबाइल नहीं, जेल इंटरकॉम से बातचीत—वायरल दावे पर उठे सवाल
मन्नू मानिकपुरी संवाददाता बिलासपुर
बिलासपुर, 24 सितंबर 2026। केंद्रीय जेल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वायरल वीडियो में जेल में बंद रितेश निखारे उर्फ ‘मैडी’ कथित तौर पर किसी से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को मोबाइल फोन से बातचीत से जोड़कर दावा किया जा रहा है, लेकिन वीडियो को ध्यान से देखने पर बातचीत मोबाइल फोन से नहीं, बल्कि जेल परिसर में उपलब्ध इंटरकॉम के माध्यम से होती दिखाई दे रही है।
यही तथ्य वायरल दावे पर सवाल खड़े करता है। वीडियो में दिखाई दे रहे उपकरण की प्रकृति को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जबकि उपलब्ध दृश्य में व्यक्ति **इंटरकॉम रिसीवर का इस्तेमाल करता नजर आ रहा है।**
बताया जा रहा है कि वीडियो **‘मोहम्मद आमिर’** नाम की सोशल मीडिया आईडी से पोस्ट किया गया है। हालांकि वीडियो कब का है, इसे कहां रिकॉर्ड किया गया और इसके साथ किए जा रहे दावों की वास्तविकता क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
### **इंटरकॉम से बातचीत की सुविधा का भी रखना होगा ध्यान**
जेल में बंदियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत परिजनों या अन्य अधिकृत मुलाकातियों से बातचीत की सुविधा दी जाती है। ऐसे मामलों में जेल की व्यवस्था के अनुसार **इंटरकॉम के माध्यम से बातचीत होना अपने आप में असामान्य बात नहीं है।**
इसलिए केवल वीडियो में किसी व्यक्ति को रिसीवर पर बातचीत करते देखकर उसे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना बताना सही तस्वीर पेश नहीं कर सकता। वायरल वीडियो में जिस उपकरण को मोबाइल फोन बताया जा रहा है, वह **इंटरकॉम जैसा दिखाई दे रहा है।**
### **मोबाइल पहुंचने का सवाल फिलहाल साबित नहीं**
यदि भविष्य में किसी जांच में प्रतिबंधित मोबाइल फोन के जेल परिसर में पहुंचने की पुष्टि होती है, तभी यह सवाल उठेगा कि वह जेल के भीतर किस माध्यम से पहुंचा और सुरक्षा जांच के दौरान कैसे नहीं पकड़ा गया।
जेल की सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर काम करती है—प्रवेश द्वार की जांच, मुलाकातियों की तलाशी, सामान की जांच और परिसर के भीतर निगरानी। इसलिए किसी वायरल वीडियो के आधार पर तत्काल किसी कर्मचारी या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा।
### **वायरल दावे और वीडियो के वास्तविक दृश्य में अंतर**
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि **वायरल चर्चा में मोबाइल फोन से बातचीत किए जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि वीडियो में व्यक्ति इंटरकॉम के जरिए बातचीत करता हुआ दिखाई देता है।** ऐसे में वीडियो को मोबाइल फोन के इस्तेमाल का प्रमाण बताने से पहले उसके वास्तविक दृश्य और संदर्भ की पुष्टि जरूरी है।
वीडियो की तारीख, स्थान और वास्तविक परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध वीडियो के आधार पर **मोबाइल फोन के इस्तेमाल का दावा स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होता।**
**जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई**
वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच जरूरी है कि तथ्य और दावे को अलग-अलग देखा जाए। यदि जेल प्रशासन या संबंधित अधिकारी मामले की जांच करते हैं तो वीडियो की वास्तविकता, उसमें इस्तेमाल किए गए उपकरण और पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल वीडियो में दिखाई दे रहे तथ्य के अनुसार **बातचीत मोबाइल फोन से नहीं बल्कि इंटरकॉम से होती नजर आ रही है।**




