*छत्तीसगढ़ की जेलों का बुरा हाल, 145 अधिकारियों का काम 50 - 55 अधिकारियों के जिम्मे*
*छत्तीसगढ़ की जेलों का बुरा हाल, 145 अधिकारियों का काम 50 - 55 अधिकारियों के जिम्मे*
*भगवान भरोसे हैं छत्तीसगढ़ की जेल - कहीं जेल अधीक्षक नहीं तो कहीं जेलर नहीं - कहीं हवलदार चला रहे हैं जेल*
छत्तीसगढ़ की जेलों की हालत इन दिनों बद से बदतर होती जा रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन-प्रशासन की लापरवाही के चलते कई जिलों की जेलें बिना स्थायी जेलर और उप जेल अधीक्षक के ही संचालित हो रही हैं।
हालात ऐसे हो गए हैं कि कहीं-कहीं हवलदार ही जेल की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहा है।
*रायपुर जेल की स्थिति*
रायपुर जेल की बात करें तो यहां नियमानुसार 22 अधिकारियों की नियुक्ति होनी चाहिए परंतु तीन, चार अधिकारी ही पूरी जेल को संचालित कर रहे हैं ऐसे में जेल के अंदर लड़ाई झगड़ा मारपीट दबंगई और जेल के अंदर से मोबाइल के माध्यम से गैंग ऑपरेट की घटनाएं होना लाजमी है |
**जशपुर: एक साल से हवलदार के भरोसे चल रही जेल**
जशपुर जिले की जेल में उप जेल अधीक्षक और जेलर का पद पिछले एक साल से रिक्त पड़ा है। इस दौरान एक हवलदार ही पूरी जेल व्यवस्था संभाल रहा है ऐसे में सुरक्षा और व्यवस्था दोनों मामलों में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
**सारंगढ़: जेलर की गैरहाजिरी और हवालदार के हवाले जेल**
सारंगढ़ जेल में भी हालात चिंताजनक हैं। करीब एक साल पहले जेल में बंद आरोपियों से मारपीट की घटना सामने आई थी, जिसमें तत्कालीन जेलर और स्टाफ के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हुआ और उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बाद श्याम लाल जांगड़े को बिलासपुर से सारंगढ़ अटैच किया गया, लेकिन वह अक्सर मुख्यालय छोड़कर बिलासपुर में ही रहते हैं।
19 मई को जेल में फिर से मारपीट की घटना हुई, जिसके बाद कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक निरीक्षण के लिए जेल पहुंचे, लेकिन जेलर श्याम लाल वहां मौजूद नहीं थे। वे छुट्टी पर चले गए। वर्तमान में सारंगढ़ जेल भी एक हवलदार द्वारा चलाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार गुप्ता जी को भी बिलासपुर से सारंगढ़ अटैच किया गया है, लेकिन वह भी छुट्टी पर हैं।
**अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनक**
विश्वसत सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ की कई अन्य जेलों में भी स्थायी जेलर या उप जेल अधीक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है। बलौदा बाजार जेल में पिछले 7 साल से एक ही जेलर पदस्थ हैं, दंतेवाड़ा में 9 साल, कोरबा में 5 साल और कवर्धा में भी 4 साल से एक ही जेलर हैं। वहीं, बिलासपुर केंद्रीय जेल में वर्तमान में कोई उप जेल अधीक्षक नहीं है।
दुर्ग केंद्रीय जेल की स्थिति भी अलग नहीं है। यहां भी उप जेल अधीक्षक का पद खाली है, जिससे जेल की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
**प्रशासन की उदासीनता सवालों के घेरे में**
जेलों में प्रशासनिक जिम्मेदारी का अभाव न सिर्फ जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पूरे राज्य की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाता है। जब उच्च पदस्थ अधिकारी ही ड्यूटी से नदारद रहें और हवलदार जैसे कर्मचारियों के भरोसे जेल चलती रहे, तो यह न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि एक बड़ी प्रशासनिक विफलता भी है।
सरकार को चाहिए कि इन खाली पदों पर जल्द नियुक्ति करे और जेल व्यवस्था को सुचारू बनाए, ताकि छत्तीसगढ़ की जेलें सुरक्षित और व्यवस्थित रह सकें। फिलहाल तो ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य की जेलें भगवान भरोसे ही चल रही हैं।
छत्तीसगढ़ के 18 जिला जेलों में 5 या 6 मैं ही जेल अधीक्षक हैं बाकी में जिला जेल बिना जेल अधीक्षकों के संचालित हो रही है |

किस-किस जेल में कितने जेल अधीक्षक डिप्टी जेलर और सहायक जेलर होने चाहिए ? और वर्तमान में कितने अधिकारी कार्यरत हैं तथा जेल के अंदर की स्थिति की विस्तृत जानकारी के लिए इंतजार करें |
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