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  • *अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की 7 अगस्त को आयोजित लोक सुनवाई आगामी आदेश तक स्थगित*

    परियोजना मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की 7 अगस्त को आयोजित लोक सुनवाई आगामी आदेश तक स्थगित

    रायपुर 05 अगस्त 2020/ कलेक्टर डॉ एस भारतीदासन ने नायब तहसीलदार, खरोरा तथा प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खरोरा के प्रतिवेदन के आधार पर आगामी 07 अगस्त को आयोजित होने वाली लोक सुनवाई को स्थगित कर दिया है।ज्ञात हो कि परियोजना मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड (यूनिट वैकुंठ सीमेंट वस), पास्ट बैकुंठ, जिला रायपुर (छ.ग.) के द्वारा ग्राम खरोरा एवं केसला, तहसील तिल्दा, जिला रायपुर में प्रस्तावित केसला लाईम स्टोन माईन ब्लॉक की स्थापना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु लोक सुनवाई 07 अगस्त को स्पोर्ट्स स्टेडियम,उप तहसील कार्यालय खरोरा के पास में रखा गया था। इस लोक सुनवाई में लगभग एक हज़ार लोगों के सम्मिलित होने की संभावना व्यक्त की गई थी। कोरोना संक्रमण के रोकथाम एवं नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए आगामी आदेश तक लोक सुनवाई को स्थगित किया गया है।

    यहां यह उल्लेख करना भी अति आवश्यक है कि विगत दिनों बलौदा बाजार के विधायक प्रमोद कुमार शर्मा द्वारा इस जनसुनवाई का विरोध किया गया था -

  • Ram Mandir Bhumi Pujan: पीएम मोदी बोले- मंदिर का अस्तित्व मिटाने की कोशिश हुई, राम हमारे मन में बसे हैं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन कर दिया है. भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी अब देश को संबोधित कर रहे हैं. पीएम मोदी ने सबसे पहले अपने भाषण में 'जय श्रीराम' के नारे लगाए.

    अयोध्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या में राम मंदिर की नींव रख दी है. भूमि पूजन के बाद पीएम मोदी अब देश को संबोधित कर रहे हैं. पीएम मोदी ने सबसे पहले अपने भाषण में 'सियावर रामचंद्र की जय' के नारे लगाए और उसके बाद अपना भाषण शुरू किया. पीएम मोदी ने राम भक्तों को इस पवित्र अवसर पर बधाई भी दीं. पीएम मोदी ने कहा कि राम मंदिर का भूमि पूजन करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. सदियों का इंतजार खत्म हो रहा है. पूरा देश रोमांचित है.

     

    श्रीराम की गूंज पूरे विश्व में है- पीएम मोदी

     

    पीएम मोदी ने कहा, ''आज श्रीराम का यह जयघोष सिर्फ सिया-राम की धरती में ही नहीं सुनाई दे रहा, इसकी गूंज पूरे विश्व में है. सभी देशवासियों को, विश्व में फैले करोड़ों राम भक्तों को आज के इस सुअवसर पर कोटि-कोटि बधाई.'' उन्होंने कहा, ''ये मेरा सौभाग्य है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुझे आमंत्रित किया, इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने का अवसर दिया. मैं इसके लिए हृदय पूर्वक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आभार व्यक्त करता हूं.''

     

    टेंट के नीचे रहे हमारे रामलला अब भव्य मंदिर में रहेंगे- पीएम मोदी

     

    पीएम मोदी ने आगे कहा, ''बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा. टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है. पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है. सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है.''

     

    मोदी ने कहा, ''हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई-कई पीढ़ियों ने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था. गुलामी के कालखंड में कोई ऐसा समय नहीं था जब आजादी के लिए आंदोलन न चला हो, देश का कोई भूभाग ऐसा नहीं था जहां आजादी के लिए बलिदान न दिया गया हो. राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था. जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राममंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है, मैं उन सबको आज 130 करोड़ देशवासियों की तरफ से नमन करता हूं.''

     

    पीएम मोदी ने कहा, ''राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं. कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं. भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए. इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं.  श्रीराम भारत की मर्यादा हैं, श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं.''


    मोदी ने भूमि पूजन के लिए किया चांदी की कन्नी का इस्तेमाल 

    बता दें कि पीएम मोदी ने मंदिर की नींव खोदने के लिए चांदी के फावड़े का इस्तेमाल किया. इस दौरान पीएम मोदी ने नींव की ईंट पर सीमेंट लगाने के लिए चांदी की कन्नी का इस्तेमाल किया. रामलला को हरे और भगवा रंग के वस्त्र पहनाए गए हैं. रामलला के वस्त्र मखमल के कपड़े से बने हैं. इन वस्त्रों पर 9 तरह के रत्नों को लगाया गया है.

  • राम मंदिर भूमि पूजन को लेकर उत्साहित हैं 'रामायण' की 'सीता', सोशल मीडिया पर कहा- ऐसा लगता है दिवाली इस साल की शुरुआत में आई है

    कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान लागू किए गए लॉकडाउन में दूरदर्शन पर रामायण का पुन: प्रसारण किया गया था, इस शो को दर्शकों ने काफी प्यार दिया. शो की लोकप्रियता को देखते हुए रामायण के कलाकार इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं.

    80 के दशक के अंत में 'रामायण' में 'सीता' की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया को राम मंदिर भूमि पूजन का बेसब्री से इंतजार है. कोरोनो वायरस संकट के कारण रक्षा बंधन के उत्सव को अभिनेत्री मिस कर रही हैं साथ ही उन्हें राम मंदिर के भूमि पूजन का भी बेसब्री से इंतजार कर रही हैं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर जाहिर किया कि वह 'रामलला के घर वापस आने' का इंतजार कर रही हैं.

     

    अभिनेत्री अपने सोशल मीडिया पेजों पर बहुत अधिक सक्रिय है और प्रशंसकों के बीच लगातार जुड़ी हुई हैं. उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान लागू किए गए लॉकडाउन में दूरदर्शन पर रामायण का पुन: प्रसारण किया गया था, इस शो को दर्शकों ने काफी प्यार दिया. शो की लोकप्रियता को देखते हुए रामायण के कलाकार इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं.

    दीपिका ने अपनी पोस्ट का कैप्शन देते हुए लिखा, "कल रक्षाबंधन था, हर साल की तरह, इसबार जश्न नहीं मना सके .... आमतौर पर मैं अपने भाई के घर जाती हूं और अपने भाई को राखी बांधती और अपनी भाभी को लुंबा बांधती हूं और एक शानजार दिन बिताती हूं. मम्मी, भाई और भाभी के साथ लंच करती हूं. कल ही अपने मैंने भाइयों को फोन कर उन्हें शुभकामनाएं दी.

     

    उन्होंने आगे राम मंदिर के बारे में लिखा, "कल राम जन्मभूमि शिलान्यास है. लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो रहा है. रामलला घर वापस आ रहे हैं. यह एक शानदार अनुभव होने जा रहा है. ऐसा लगता है दिवाली इस साल की शुरुआत में आई है. बेसब्री से इंतजार है. "

  • PM Modi ने रामलला को किया दंडवत प्रणाम, पीएम ने पारिजात वृक्ष का रोपड़ भी किया.

    हनुमानगढ़ी में दर्शन करने के बाद पीएम मोदी भूमि पूजन के लिए पहुंचे. उन्होंने राम लला के सामने साष्टांग प्रणाम भी किया

    अयोध्या के बीचों बीच हनुमानगढ़ी में रामभक्त हनुमानजी का विशाल मंदिर है. ऐसी मान्यता है कि अयोध्या में सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में बजरंगबली के दर्शन करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए, फिर किसी दूसरे मंदिर जाना चाहिए.सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर के दर्शन करने के पीछे 'राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे...' वाली मान्यता दिखती है. यानी हनुमानजी की कृपा के बिना किसी को रामजी का आशीर्वाद नहीं मिलता है.
  • प्रधानमंत्री हनुमानगढ़ी पहुंचे हैं ,उन्होंने बजरंग बली के सामने शीश नवाया

    प्रधानमंत्री अभी-अभी हनुमानगढ़ी पहुंचे हैं और यहां वो भगवान हनुमान के दर्शन करेंगे और उनकी आरती करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के प्रांगण में पहुंच चुके हैं और वहां उन्होंने बजरंग बली के सामने शीश नवाया. कोरोना संकट के कारण उन्हें टीका भी नहीं लगाया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने हनुमानगढ़ी मंदिर में कुछ दान भी चढ़ाया है.

  • राजभवन हुआ लॉकडाउन  --   प्रवेश प्रतिबंधित

    खबर का असर  --  राजभवन हुआ लॉकडाउन  --   प्रवेश प्रतिबंधित

     
     राजभवन में एक रसोईया एवं दो जवानों के करोना पीड़ित पाए जाने के बाद सीजी 24 न्यूज़ चैनल ने इस खबर को प्रमुखता से प्रसारित किया था कि मास्क के बिना सोशल - डिस्टेंसिंग और सैनिटाइज की गाइड लाइन का पालन न करने की लापरवाही भी राजभवन में कारोना प्रवेश का कारण बनी |

    विगत दिनों राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके के कार्यकाल का 1 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अनेक लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे थे, राजभवन के अधिकारियों ने इस दौरान सोशल डिस्पेंसिंग मास्क एवं सैनिटाइजेशन की अनिवार्यता को नजरअंदाज कर दिया |
    राजभवन में मंत्रियों जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके को प्रत्यक्ष बधाइयां दी|
    कारोना काल में लॉकडाउन के बावजूद राजभवन में सभी को प्रवेश की अनुमति देकर राजभवन के अधिकारियों ने स्वयं होकर कोरोना वायरस को राजभवन में आमंत्रित किया |

    अनेक लोगों द्वारा राज भवन में प्रवेश कर राज्यपाल को बधाई देने के के दौरान मास्क नही पहनने की गलती का खामियाजा राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके के लिए खतरा बन सकती है जिसके लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए - 

    सीजी 24 न्यूज़ की खबर को संज्ञान में लेते हुए राजभवन प्रशासन ने राजभवन में राज्यपाल से मिलने वालों पर 9 अगस्त तक के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है

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    CG 24 News 3 Aug की खबर जिस पर संज्ञान लिया गया 

    राजभवन में करोना वायरस के प्रवेश के लिए अधिकारी है जिम्मेदार


    राजभवन के 2 जवानों एवं एक रसोईया के कारोना पॉजिटिव पाए जाने से राजभवन भी कंटेनमेंट जोन की श्रेणी में आ गया है |
    राजभवन में कारोना प्रवेश के लिए वहां के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए -

     उल्लेखनीय है कि राज्यपाल से मिलने आने वालों से गाइडलाइन का पालन करवाने और करने में जिम्मेदार अधिकारियों ने लापरवाही करके बड़ा खतरा मोल ले लिया है | 
    विगत दिनों राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके के कार्यकाल का 1 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अनेक लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे थे, राजभवन के अधिकारियों ने इस दौरान सोशल डिस्पेंसिंग मास्क एवं सैनिटाइजेशन की अनिवार्यता को नजरअंदाज कर दिया |
    राजभवन में मंत्रियों जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके को प्रत्यक्ष बधाइयां दी|
    कारोना काल में लॉकडाउन के बावजूद राजभवन में सभी को प्रवेश की अनुमति देकर राजभवन के अधिकारियों ने स्वयं होकर कोरोना वायरस को राजभवन में आमंत्रित किया |

    इस तस्वीर में आप स्पष्ट देख सकते हैं कि राज्यपाल को बधाई देने वाले सभी लोग बिना मास्क पहने डिस्टेंस के बगैर गुलदस्ता भेंट कर उन्हें बताई दे रहे हैं | राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके भी बिना मास्क लगाए इतने लोगों के बीच गाइडलाइन का उल्लंघन कर अभिवादन स्वीकार कर रही हैं, ऐसे में कारोना वायरस ने अगर राजभवन में प्रवेश किया है तो यह कोई अप्रत्याशित बात नहीं कहलाएगी |

  • मोतियाबिंद की सरल, सस्ती और बिना ऑपरेशन के इलाज की तकनीक विकसित
    नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों ने मोतियाबिंद की सरल, सस्ती और बिना ऑपरेशन के इलाज की तकनीक विकसित की है

    मोतियाबिंद अंधेपन का एक प्रमुख रूप है जो तब होता है जब हमारी आंखों में लेंस बनाने वाले क्रिस्टलीय प्रोटीन की संरचना बिगड़ जाती हैजिससे क्षतिग्रस्त या अव्यवस्थित प्रोटीन एकत्र होकर एक और नीली या भूरी परत बनाते हैंजो अंततः लेंस की पारदर्शिता को प्रभावित करता है। इस प्रकारइन समुच्चयों के गठन के साथ-साथ रोग की प्रगति के प्रारंभिक चरण में रोकना मोतियाबिंद की एक प्रमुख उपचार रणनीति हैऔर इस कार्य के लिए सामग्री मोतियाबिंद की रोकथाम को सस्ती और सुलभ बना सकती है।

    भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले एक स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (गैर-दाहक या उत्तजेक दवा)-एनएसएआईडी एस्पिरिन से नैनोरोड विकसित किया हैजो एक लोकप्रिय दवा है जिसका उपयोग दर्दबुखारया सूजन को कम करने के लिए किया जाता है और यह मोतियाबिंद के खिलाफ एक प्रभावी गैर-आक्रामक छोटे अणु-आधारित नैनोथेरेप्यूटिक्स के रूप में भी पाया गया।

    जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री बी में प्रकाशित उनका शोध एक सस्ते और कम जटिल तरीके से मोतियाबिंद को रोकने में मदद कर सकता है। उन्होंने स्व-निर्माण की एंटी-एग्रीगेशन क्षमता का उपयोग मोतियाबिंद के खिलाफ एक प्रभावी गैर-प्रमुख छोटे अणु-आधारित नैनोटेराप्यूटिक्स के रूप में किया है। एस्पिरिन नैनोरोड क्रिस्टलीय प्रोटीन और इसके विखंडन से प्राप्त विभिन्न पेप्टाइड्स के एकत्रीकरण को रोकता हैजो मोतियाबिंद बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जैव-आणविक संबंधों के माध्यम से प्रोटीन/पेप्टाइड के एकत्रीकरण को रोकते हैंजो बीटा-टर्न जैसे क्रिस्टलीय पेप्टाइड्स की संरचना में बदल देते हैंजो कॉइल्स (लच्छे) और कुंडल में अमाइलॉइड बनने के लिए जिम्मेदार होते हैं। ये क्रिस्टलीनऔर क्रिस्टलीन व्युत्पन्न पेप्टाइड समुच्चय के एकत्रीकरण को रोककर मोतियाबिंद बनने में रोकने के लिए पाए गए थे। उम्र बढ़ने के साथ और विभिन्न परिस्थितियों मेंलेंस प्रोटीन क्रिस्टलीन समुच्चय नेत्र लेंस में अपारदर्शी संरचनाओं का निर्माण करता हैजो दृष्टि को बाधित करता है और बाद में मोतियाबिंद का कारण भी बनता है।

    संचित अल्फा-क्रिस्टलीन प्रोटीन और क्रिस्टलीन व्युत्पन्न पेप्टाइड समुच्चय वृद्ध और मोतियाबिंद मानव लेंस में लक्षित असहमति को मोतियाबिंद बनने की रोकथाम के लिए एक व्यवहार्य चिकित्सीय रणनीति माना जाता है। एस्पिरिन नैनोरोड्स आणविक स्व-जमा होने की प्रक्रिया का उपयोग करके उत्पादित किए जाते हैंजो आम तौर पर नैनोकणों के संश्लेषण के लिए उपयोग किए जाने वाले उच्च लागत और श्रमसाध्य भौतिक तरीकों की तुलना में एस्पिरिन नैनोरोड उत्पन्न करने के लिए कम लागत और उच्च-स्तरीय तकनीक से होता है।

    आणविक गतिकी (एमडी) अनुकरण पर आधारित कम्प्यूटेशनल अध्ययन एस्पिरिन के एंटी-एग्रीगेशन व्यवहार और आणविक पेप्टाइड्स और एस्पिरिन के बीच प्रोटीन (पेप्टाइड) की प्रकृति के आणविक तंत्र की जांच करने के लिए किए गए थे। यह देखा गया कि पेप्टाइड-एस्पिरिन (अवरोधक) अंतःक्रियाओं ने पेप्टाइड्स को द्वितीयक संरचनाओं को बीटा-टर्न से बदल दियाजो एमाइलॉयड्स बनने के लिए जिम्मेदार हैंविभिन्न कॉइल्स (लच्छे) और कुंडल (हेलिक्स) मेंइसके एकत्रीकरण को भी रोकते हैं। इस अनुकरण ने एस्पिरिन के मॉडल मोतियाबिंद पेप्टाइड्स द्वारा अमाइलॉइड जैसे फाइब्रिल गठन के लिए एक संभावित अवरोधक के रूप में कार्य करने की क्षमता को उजागर किया है।

    कई प्राकृतिक यौगिकों को पहले ही क्रिस्टलीन एकत्रीकरण के लिए संभावित एकत्रीकरण अवरोधक के रूप में चिह्नित किया गया हैलेकिन इस दिशा में गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (गैर-दाहक या उत्तजेक दवा)-एनएसएआईडी जैसे एस्पिरिन उपयोगिता एक नया प्रतिमान भी स्थापित करेगी। इसके अलावाअपने नैनो-आकार के कारण एस्पिरिन नैनोरोड्स जैव उपलब्धतादवा की गुणवत्ताकम विषाक्तता आदि में सुधार करेंगे। इसलिएआई-ड्रॉप के रूप में एस्पिरिन नैनोरोड्स मोतियाबिंद के इलाज के लिए एक प्रभावी और व्यवहार्य विकल्प के रूप में कार्य करने वाला है।

    प्रयोग करने में आसान और कम लागत वाले इस वैकल्पिक उपचार पद्धति से विकासशील देशों में उन रोगियों को लाभ होगा जो मोतियाबिंद के महंगे उपचार और शल्यचिकित्सा का खर्च वहन नहीं कर सकते।

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    (प्रकाशन विवरण:

    बिष्टए.शर्माएम.शर्माएस.अलीएम. ई.और पांडाजे.जे. (2019)। अल्फा-क्रिस्टलीन-व्युत्पन्न पेप्टाइड समुच्चय के प्रति एंटी-एग्रीगेशन एजेंटों के रूप में करियर-मुक्त स्व-निर्मित एस्पिरिन नैनोरोड्स: गैर-आक्रामक मोतियाबिंद चिकित्सा में संभावित निहितार्थ। जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री बी, 7 (44), 6945-6954

    अधिक जानकारी के लिएडॉ. जीवन ज्योति पांडा (jyoti@inst.ac.in) से संपर्क किया जा सकता है।)

  • राजभवन में करोना - अधिकारी जिम्मेदार

    राजभवन में करोना वायरस के प्रवेश के लिए अधिकारी है जिम्मेदार

     राजभवन भी कंटेनमेंट जोन की श्रेणी में 

    सोशल डिस्टेंसिंग मास्क एवं सैनिटाइजेशन की अनिवार्यता को नजरअंदाज कर दिया |


    राजभवन के 2 जवानों एवं एक रसोईया के कारोना पॉजिटिव पाए जाने से राजभवन भी कंटेनमेंट जोन की श्रेणी में आ गया |
    राजभवन में कारोना प्रवेश के लिए वहां के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए -

     उल्लेखनीय है कि राज्यपाल से मिलने आने वालों से गाइडलाइन का पालन करवाने और करने में जिम्मेदार अधिकारियों ने लापरवाही करके बड़ा खतरा मोल ले लिया है | 
    विगत दिनों राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके के कार्यकाल का 1 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अनेक लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे थे, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके को उनके कार्यकाल का एक साल पूरा होने पर बधाई देते समय मास्क नहीं पहना था और ना ही राज्यपाल ने - राजभवन के अधिकारियों ने इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग - मास्क एवं सैनिटाइजेशन की अनिवार्यता को नजरअंदाज कर दिया | राजभवन में मंत्रियों जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके को प्रत्यक्ष बधाइयां दी |

    कारोना काल में लॉकडाउन के बावजूद राजभवन में सभी को प्रवेश की अनुमति देकर राजभवन के अधिकारियों ने स्वयं होकर कोरोना वायरस को राजभवन में आमंत्रित किया |

    इस तस्वीर में आप स्पष्ट देख सकते हैं कि राज्यपाल को बधाई देने वाले सभी लोग बिना मास्क पहने डिस्टेंस के बगैर गुलदस्ता भेंट कर उन्हें बताई दे रहे हैं | राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके भी बिना मास्क लगाए इतने लोगों के बीच गाइडलाइन का उल्लंघन कर अभिवादन स्वीकार कर रही हैं |

    दूसरी तरफ मंत्री रविंद्र चौबे ने पूरी सुरक्षा के साथ गाइडलाइन का पालन करते हुए राज्यपाल को बधाई दी - साथ ही राजभवन के वरिष्ठ अधिकारी सोनमणि बोरा सहित अन्य अधिकारीयों कर्मचारियों ने भी कोविड से बचाव के साथ उन्हें बधाई दी -

    ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से अगर कारोना वायरस ने राजभवन में प्रवेश किया है तो यह कोई अप्रत्याशित बात नहीं कहलाएगी |

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करना पॉजिटिव हुए - स्वयं किया ट्वीट
     

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं ट्वीट कर कहा कि कोरोना के शुरूआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।  मेरी तबीयत ठीक है परन्तु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूँ। मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग गत कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आयें हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएं।

     

  • मंत्री बंगले में 8 कर्मचारियों के कारोना पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद बंगला सैनिटाइज नहीं
    प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के बंगले में विगत दिनों दो कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद आज आई रिपोर्ट के अनुसार आठ और कोरोना पॉजिटिव कर्मचारी पाए गए हैं | स्वास्थ्य मंत्री के बंगले में इतनी संख्या में कर्मचारियों के करोना पॉजिटिव पाये जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है | दूसरी तरफ यह भी देखने में आया है कि इतनी संख्या में कर्मचारियों के कारोना पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद बंगले को सील नहीं किया गया है और ना ही बंगले को सैनिटाइज किया गया है साथ ही किसी तरह की कोई सुरक्षा व्यवस्था वहां नहीं की गई है, लोगों के आने-जाने पर भी प्रतिबंध नहीं लगाया गया है |देखने में आ रहा है कि बंगले में आने जाने वालों का सिलसिला लगातार जारी है | प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के बंगले को ना ही कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया और ना ही उस क्षेत्र में आवाजाही बंद की गई है और ना ही सील किया गया है बंगले के अंदर का नजारा आम दिनों की तरह ही है जो प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है |
  • छत्तीसगढ विधान सभा के मानसून सत्र की अधिसूचना जारी।
    छत्तीसगढ विधान सभा के मानसून सत्र की अधिसूचना जारी। 25 अगस्त से 28 अगस्त तक चलेगा विधानसभा सत्र
  • 10 बड़ी बातें: देश में आई नई शिक्षा नीति, प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक हुए अहम बदलाव

    देश की शिक्षा नीति में ये बदलाव करीब 34 साल बाद पेश किया गया है. इसमें एक ओर प्राइमरी स्तर पर मातृ भाषा में शिक्षा का प्रावधान किया गया है तो ग्रेजुएशन स्तर पर डिग्री कोर्स को 4 साल तक का कर दिया गया है.

     देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव का एलान हुआ है. केंद्र सरकार ने बुधवार 29 जुलाई को देश में नई शिक्षा नीति की घोषणा की, जिसके तहत प्राइमरी से लेकर यूनिवर्सिटी स्तर तक की शिक्षा में व्यापक बदलाव किए गए हैं. इसके अलावा देश में शिक्षा का जिम्मेदारी संभाल रहे मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर भी शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. नई शिक्षा नीति को व्यावहारिकता और कौशल विकास पर जोर दिया गया है.

     

    देश की शिक्षा नीति में ये बदलाव करीब 34 साल बाद पेश किया गया है. इसमें एक ओर प्राइमरी स्तर पर मातृ भाषा में शिक्षा का प्रावधान किया गया है तो ग्रेजुएशन स्तर पर डिग्री कोर्स को 4 साल तक का कर दिया गया है.

    1. कम से कम पांचवी कक्षा तक और संभव हो तो आठवीं और उसके आगे भी स्थानीय भाषा या मातृभाषा में पढ़ाई कराई जाएगी. यानी हिंदी, अंग्रेजी जैसे विषय भाषा के पाठ्यक्रम के तौर पर तो होंगे, लेकिन बाकी पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे.
    2. देश में 10+2 के आधार पर चलने वाली पद्धति में बदलाव होगा. अब ये 5+3+3+4 के हिसाब से पाठ्यक्रम होगा. यानी प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवी तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12वीं तक आखिरी हिस्सा होगा.
    3. नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षाओं को तो बरकरार रखा गया है, लेकिन इन्हें ज्ञान आधारित बनाया जाएगा और उसमें रटकर याद करने की आदतों को कम से कम किया जाएगा.
    4. बच्चा स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में भी भूमिका निभाएगा. अब तक रिपोर्ट कार्ड केवल अध्यापक लिखता है. लेकिन नई शिक्षा नीति में तीन हिस्से होंगे. पहला बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए.
    5. इतना ही नहीं, अब कक्षा छठीं से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) में मदद करेगी.
    6. अंडर ग्रेजुएट कोर्स को अब 3 की बजाए 4 साल का कर दिया गया है. हालांकि छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री हासिल कर पाएंगे, लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर पाएंगे. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं करना है. हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी
    7. इतना ही नहीं, ग्रेजुएशन के तीनों साल को सार्थक बनाने का भी कदम उठाया गया है. इसके तहत 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल हो जाएगी.
    8. इसके साथ ही Phil को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, जबकि MA के बाद छात्र सीधे Phd कर पाएंगे.
    9. नई शिक्षा नीति में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे. अब किसी भी डीम्ड यूनिवर्सिटी और सरकारी यूनिवर्सिटी के नियम अलग अलग नहीं होंगे.
    10. नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है. राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना की जाएगी