आरंग में बाढ़ से त्राहिमाम: प्रशासन की लापरवाही पर भड़के पूर्व मंत्री, कहा—'कागजी दावों में उलझा शासन, आरंग क्षेत्र की जनता राम भरोसे'
आरंग में बाढ़ से त्राहिमाम: प्रशासन की लापरवाही पर भड़के पूर्व मंत्री, कहा—'कागजी दावों में उलझा शासन, आरंग क्षेत्र की जनता राम भरोसे'
‘प्रशासन की सुस्ती से जलमग्न हुए गाँव, 40 जिंदगियों को तत्काल रेस्क्यू करे सरकार’: डॉ शिवकुमार डहरिया
प्रदेश में हो रही मूसलाधार बारिश और धमतरी स्थित गंगरेल बांध से छोड़े गए लगभग ढाई लाख क्यूसेक पानी ने आरंग क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। निसदा बैराज की जल-निकासी क्षमता 1.60 लाख क्यूसेक है, जबकि वर्तमान में यहाँ 4.5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का प्रचंड दबाव बना हुआ है। पानी बैराज के ऊपर से बह रहा है, जिससे निसदा, गोइंदा, छटेरा, बनचरौदा सहित दर्जनों गाँव जलमग्न हो चुके हैं और मुख्य मार्ग डूबने से कई गाँवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। सैकड़ों एकड़ में फैली धान की फसल जलसमाधि ले चुकी है।
बाढ़ के इस विकराल रूप के बीच शासन-प्रशासन की बदइंतजमी और पूर्व-तैयारी के अभाव की पोल खुलकर सामने आ गई है। सबसे भयावह स्थिति ग्राम पंचायत उमरिया की है, जहाँ कोल्हान नाले के उफान पर आने से लगभग 40 ग्रामीण बाढ़ के पानी के बीच घिरे हुए हैं और जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
"आरंग मेरा परिवार, जनता को इस हाल में असहाय नहीं छोड़ सकता"
क्षेत्र की इस दर्दनाक स्थिति पर गहरा दुःख और आक्रोश व्यक्त करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व क्षेत्रीय विधायक ने कहा कि आरंग क्षेत्र का हर नागरिक उनका परिवार है। उन्होंने कहा, "बाढ़ की यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक और हृदयविदारक है। आपदा के इस समय में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सुस्त नजर आ रहा है। जब निसदा बैराज पर क्षमता से तीन गुना पानी पहुँच रहा था, तब प्रशासन अलर्ट मोड पर क्यों नहीं था.? समय रहते पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए.?"
उन्होंने शासन और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही का खामियाजा आज निसदा,गोइंदा, समोदा, चपरीद, कागदेही,उमरिया सहित महानदी के तटीय क्षेत्रों के निर्दोष ग्रामीण भुगत रहे हैं।
प्रशासन की सुस्ती पर पूर्व मंत्री के कड़े सवाल और प्रमुख माँगे:
युद्धस्तर पर रेस्क्यू कार्य: ग्राम उमरिया में पानी के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रहे 40 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए SDRF और आपदा प्रबंधन की टीमों को अत्याधुनिक नावों व संसाधनों के साथ तत्काल झोंका जाए।
राहत शिविरों में बदहाली दूर हो: विस्थापित ग्रामीणों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में भोजन, शुद्ध पेयजल, सूखा राशन, तिरपाल और दवाइयों की निर्बाध व्यवस्था की जाए। प्रशासन केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहे।
महामारी से बचाव व स्वास्थ्य सेवाएँ: बाढ़ के पानी से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए प्रभावित गाँवों में तत्काल स्थायी मेडिकल टीमों की तैनाती की जाए।
फसल व मकान क्षतिपूर्ति का तत्काल ऐलान: जलमग्न हुई सैकड़ों एकड़ धान की फसलों और क्षतिग्रस्त मकानों का पारदर्शी व निष्पक्ष सर्वेक्षण कराकर पीड़ित किसानों को बिना किसी लालफीताशाही के तुरंत उचित मुआवजा दिया जाए।
जनता से धैर्य और सतर्कता की अपील
पूर्व मंत्री ने आरंग क्षेत्र की जनता से संयम और सतर्कता बनाए रखने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि कोई भी नागरिक उफनते नदी-नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और निसदा बैराज के पास न जाए तथा सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करे। उन्होंने क्षेत्रवासियों को आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में वे उनके हक और सुरक्षा की लड़ाई सड़क से लेकर शासन के दरवाजे तक पूरी मजबूती से लड़ेंगे।


