साइबर ठगों की शरणस्थली बना छत्तीसगढ़, सरकार केवल एडवाइजरी जारी कर पल्ला झाड़ रही है -कांग्रेस
साइबर ठगों की शरणस्थली बना छत्तीसगढ़, सरकार केवल एडवाइजरी जारी कर पल्ला झाड़ रही है -कांग्रेस
जीवनभर की जमा पूंजी गंवाकर पीड़ित दर-दर भटकने मजबूर, शिकायत के बावजूद बैंकों और पुलिस में समन्वय नहीं
रायपुर/06 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के लिए भाजपा सरकार की अकर्मण्यता और प्रशासनिक नाकामी को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार डिजिटल इंडिया के नाम पर साइबर सुरक्षा और ‘डिजिटल सुरक्षा’ के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि छत्तीसगढ़ के हर जिले में रोज दर्जनों आम नागरिक, बुजुर्ग और सेवानिवृत्त कर्मचारी, अधिकारी अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई साइबर ठगों के हाथों गंवा रहे हैं। सरकार केवल कागजी ‘एडवाइजरी’ जारी करके अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज होने के बाद भी बैंकों और पुलिस के बीच समन्वय न होने के कारण पीड़ित का पैसा होल्ड नहीं हो पाता। इस सरकार में राज्य स्तर पर कोई मजबूत ‘साइबर रिकवरी मैकेनिज्म’ या समर्पित टास्क फोर्स नहीं बनाई गई है। सरकार की अकर्मण्यता से वरिष्ठ नागरिक और पेंशनभोगी अपने जीवनभर की प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी की पूंजी मिनटों में व्यर्थ गवां रहे हैं। बड़ी संख्या में महिलाएँ एवं युवा वर्क-फ्रॉम-होम और ऑनलाइन जॉब स्कैम के नाम पर ठगे जा रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान पुलिस का ध्यान जन-सुरक्षा और जमीनी स्तर पर साइबर अवेयरनेस कैंप लगाने के साथ-साथ अपराधियों को दूसरे राज्यों जैसे जामताड़ा और नूंह से पकड़कर लाने पर रहता था। वर्तमान भाजपा सरकार में पुलिस प्रशासन केवल ‘सलाहकार’ बनकर रह गया है, एक्शन गायब है। सबसे ज्यादा सायबर ठगी मध्यम वर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, गृहिणी और छोटे व्यापारियों से हो रही है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि साइबर थानों और प्रादेशिक साइबर सेल के पास अत्याधुनिक तकनीक, स्पेशल ट्रेनिंग और पर्याप्त मैनपावर (स्टाफ) की भारी कमी है। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। यदि राज्य की पुलिस त्वरित एफआईआर दर्ज नहीं करेगी और बैंकों के साथ रियल-टाइम डेटा शेयरिंग नहीं करेगी, तो केंद्र की हेल्पलाइन किसी काम की नहीं है। जनता को दोष देना सरकार की कायरता है। सरकार केवल एडवाइजरी जारी कर झाड़ रही पल्ला, पीड़ित दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जिन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का जीवनभर का जमा-पूंजी डूब गया, क्या सरकार उनके लिए कोई ‘रिलीफ फंड’ या त्वरित विधिक सहायता देने की योजना बनाएगी?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार साइबर अपराधियों के सामने पूरी तरह घुटने टेक चुकी है। सरकार का काम केवल सोशल मीडिया पर ‘एडवाइजरी’ जारी करना नहीं, बल्कि अपराधियों की गर्दन पकड़ना और जनता का लुटा हुआ पैसा वापस दिलाना है। साय सरकार की इस नाकामी से आज छत्तीसगढ़ की जनता खुद को असहाय महसूस कर रही है। क्या प्रदेश का गृह विभाग और सायबर सेल केवल एडवाइजरी छापने वाली एजेंसी बनकर रह गया है? अपराधियों को पकड़ने और वसूली के लिए ठोस कार्रवाई कब होगी? शिकायत दर्ज होने के बाद भी पीड़ितों का पैसा फ्रीज क्यों नहीं हो पाता है? बैंकों और पुलिस के बीच समन्वय की कमी का जिम्मेदार कौन है? क्या कारण है कि अन्य राज्यों से चलने वाले साइबर गैंग्स पर छत्तीसगढ़ पुलिस की स्पेशल टीम कार्रवाई करने से कतरा रही है? प्रत्येक जिले में समर्पित और आधुनिक साइबर पुलिस थाना स्थापित करने और पर्याप्त तकनीकी स्टाफ देने में सरकार को क्या परेशानी है?


