रायपुर धरसीवा मंदिर हसौद और अभनपुर में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के षड्यंत्र के खिलाफ विकास उपाध्याय ने न्यायालय में याचिका दायर की
रायपुर धरसीवा मंदिर हसौद और अभनपुर में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के षड्यंत्र के खिलाफ विकास उपाध्याय ने न्यायालय में याचिका दायर की
भाजपा सरकार का जनविरोधी चेहरा उजागर
टाटा पावर के बहाने छत्तीसगढ़ की जनता और बिजली व्यवस्था को पूंजीपतियों के हाथ बेचने का षड्यंत्र
टाटा को वितरण लाइसेंस मानदंड अवहेलना में सरकार की सांठगांठ
अन्य राज्यों में निजी समानांतर लाइसेंस का कड़वा सच
‘‘पीएम सूर्य घर योजना’’ - मुफ्त बिजली के फर्जी जाल में जनता को बीजेपी फाँस रही है
भाजपा की मोदी शासन और विष्णु सरकार उद्योग क्षेत्र की कमर तोड़ना चाहती है
केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार की ऊर्जा क्षेत्र में पूर्ण विफलता
कांग्रेस का जनहितकारी प्रबंधन जनता ने अनुभव किया है - विकास उपाध्याय
रायपुर (छत्तीसगढ़) दिनांक 21.09.2026। पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने रायपुर जिले (रायपुर धरसीवा मंदिर हसौद और अभनपुर) में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के षड्यंत्र के खिलाफ न्यायालय में याचिका लगाई है और भाजपा सरकार की जनविरोधी बिजली नीतियों पर करारा प्रहार किया है। उपाध्याय ने बताया कि आज छत्तीसगढ़ का अस्तित्व यहाँ के गरीबों, किसानों, मध्यम वर्ग और हमारे स्थानीय उद्योगपतियों का हक खतरे में है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और सार्वजनिक संपत्तियों को अपने उद्योगपति मित्रों के हाथों नीलाम करने के लिये आतुर है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि हाल ही में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका (पीटीशन नं. 89 ऑफ 2026) लगाकर रायपुर, धरसीवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्र में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस (पैरालेल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस) माँगा गया है। मैं इस जनविरोधी, गरीब-विरोधी और छत्तीसगढ़-विरोधी प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करता हूँ।
उपाध्याय ने कहा कि आज भाजपा की करतूत जनता के समक्ष रखकर मैं भाजपा की राज्य और केंद्र सरकार से कुछ तीखे सवाल पूछना चाहता हूँ:-
1. टाटा को वितरण लाइसेंस मानदंड अवहेलना में सरकार की सांठगांठ:-
टाटा ने अपनी लाइसेंस एप्लीकेशन में आगामी 5 वर्ष में चाहे गये क्षेत्र में सीएसपीडीसीएल के बराबरी का नेटवर्क स्थापित करने हेतु चरणबद्ध तरीके से केवल 435 करोड़ राशि लगाने की जानकारी दी है। इतनी कम राशि में संपूर्ण क्षेत्र में बिजली वितरण व्यवस्था हेतु नए 33 एवं 11 केवी सबस्टेशन तथा लाइन बनाना असंभव है। अंततः टाटा पॉवर सीएसपीडीसीएल के ग्रिड के लघुकलिक उपयोग / पिगी बैकिंग हेतु मांग करेगा और अंधभक्त सरकार इसमें टाटा का पूर्ण सहयोग करेगी।
2. अन्य राज्यों में निजी समानांतर लाइसेंस का कड़वा सच:-
देश के कई राज्यों (जैसे महाराष्ट्र और ओडिसा के कुछ क्षेत्रों में निजी वितरण कंपनियों का प्रयोग पूरी तरह विफल (फेलियर) साबित हुआ है। निजी कंपनियाँ केवल मुनाफा कमाने के लिए काम करती हैं, मेंटेनेंस के नाम पर उपभोक्ता को बेसहारा छोड़ देती हैं और बिल कई गुना बढ़ा देती हैं। जिसके कारण जनता पर दोहरी मार पड़ती है
3. स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता की जेब पर डाका:-
पहले सीएसपीडीसीएल द्वारा टाटा से ही स्मार्ट मीटर लगाकर लोगों को फायदा पहुंचाने की बात कही गई, अब पता चला कि ये तो टाटा के फायदे के लिए किया गया था।स्मार्ट मीटर लगाने के बाद पूरे प्रदेश में आम जनता के बिजली बिलों में 15- 20 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। बिना किसी पूर्व सूचना के प्री-पेड और स्मार्ट मीटर के नाम पर गरीबों और मध्यम वर्ग की खून-पसीने की कमाई लूटी जा रही है।
4. भविष्य में प्रति यूनिट बिजली दरों की आसमान छूने की आशंका:-
निजी कंपनी के प्रवेश से भविष्य में बिजली दरें बेतहाशा बढ़ेंगी। जब सरकारी कंपनी कमजोर हो जाएगी, तो टाटा पावर जैसी निजी कंपनियाँ अपनी एकाधिकार (मोनोपॉली) स्थापित करेंगी और व्हीलिंग चार्ज व अन्य उपकरों के बहाने प्रति यूनिट दर में अप्रत्याशित वृद्धि कर जनता का शोषण करेंगी।
5. सरकारी संस्था सीएसपीडीसीएल को खत्म करने टाटा पावर के बहाने छत्तीसगढ़ की जनता और बिजली व्यवस्था को पूंजीपतियों के हाथ बेचने का षड्यंत्र:-
ए) लाभ कमाने वाले मुनाफे के क्षेत्रों की “चेरी पिकिंग” से सीएसपीडीसीएल को भारी नुकसान। टाटा पावर ने रायपुर जिले के केवल उन 4 तहसीलों को चुना है जहाँ से राजस्व की वसूली सबसे अधिक होती है (हाई-रेवेन्यू जोन)।
बी) सीएसपीडीसीएल (कोई मुनाफा कमाने वाली कंपनी नहीं है बल्कि यह राज्य की जनता के कल्याण (वेलफेयर) के लिए काम करने वाली एक सरकारी संस्था है जो ‘‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’’ के सिद्धांत पर गरीब जनता और किसानों को रियायती दर पर बिजली देती है।
सी) सीएसपीडीसीएल द्वारा निजी उद्योगों से किए पीपीए (पावर परचेस एग्रीमेंट) भी आधार में हो जाएंगे। जिससे सीएसपीडीसीएल एवं उद्योगों दोनों को घाटा होगा।
डी) यदि टाटा पावर जैसी निजी कंपनी को लाइसेंस दिया गया, तो वे केवल मलाईदार (उच्च राजस्व देने वाले, औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों को हथिया लेंगी। राज्य की सरकारी कंपनी सीएसपीडीसीएल के पास केवल कम राजस्व वाले ग्रामीण क्षेत्र, किसान (कृषि पंप) और बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ता रह जाएंगे। सीएसपीडीसीएल दीवालियापन की कगार पर पहुंच जाएगी। बढ़ते घाटे , कम राजस्व और लाभदायक राजस्व क्षेत्र छीन जाने के चलते सीएसपीडीसीएल को भारी वित्तीय नुकसान होगा और वो किसानों और गरीब उपभोक्ताओं की क्रॉस सब्सिडी नहीं दे पाएगी और अंततः सारा नुकसान जनता के ऊपर थोप दिया जाएगा।
ई) ‘‘पीएम सूर्य घर योजना’’ - मुफ़्त बिजली का फ़र्ज़ी छलावा:-
केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा विज्ञापित पीएम सूर्य घर योजना मुफ़्त बिजली एक झूठा और फ़र्ज़ी वादा है। सब्सिडी के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है। मुफ़्त के नाम पर पहले जनता से ही पैसा लेकर 25 साल के लिए सोलर की बिजली सस्ती दर पर ग्रिड में खरीदी जाएगी और वही बिजली ग्रिड से लेने पर बढ़ा हुआ मार्केट रेट देय होगा। मुफ़्त के नाम पर जनता से धोखा।
एफ) उद्योग क्षेत्र (इंडस्ट्रीयल सेक्टर) की कमर तोड़ना:-
रायपुर, धरसींवा और अभनपुर राज्य के प्रमुख औद्योगिक केंद्र हैं जहां स्थानीय स्पंज आयरन रोलिंग मिल और लघु-मध्यम उद्योग संचालित होते हैं। महंगे बिजली टैरिफ और अनियोजित नीतियों के कारण स्थानीय लघु, मध्यम और भारी उद्योग पहले ही मंदी से जूझ रहे हैं। यदि निजी कंपनी को प्रवेश दिया गया, तो औद्योगिक बिजली दरों में अप्रत्याशित वृद्धि होगी, जिससे हमारे स्थानीय उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो जाएँगे और लाखों स्थानीय युवाओं का रोजगार छीन जाएगा।
जी) हम सार्वजनिक विद्युत कंपनियों को बिकने नहीं देंगे:-
(लाभ कमाती सीएसईबी को भाजपा ने तोड़ा; कांग्रेस सरकार ने घाटा कम किया )
- भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड: पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों ने एक समय की बेहद मजबूत और मुनाफे में चल रही ‘‘छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल’’ (सीएसईबी) को विघटित कर 5 अलग-अलग घाटे वाली कंपनियों में बांट दिया था।
- कांग्रेस का जनहितकारी प्रबंधन (2018-2024)ः कांग्रेस सरकार ने 2019 से 2024 के अपने कार्यकाल में कुशल वित्तीय प्रबंधन का परिचय दिया। कांग्रेस सरकार ने 5 में से 2 कंपनियों का विलय कर कुल 3 प्रभावी कंपनियां बनाईं और बिजली कंपनियों के करोड़ों रुपये के घाटे को कम करके व्यवस्था को मजबूत किया।
6. केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार की ऊर्जा क्षेत्र में पूर्ण विफलता:-
केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की साय सरकार पूरी तरह से बिजली क्षेत्र में विफल साबित हुई हैं। एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ कोयला और बिजली का उत्पादन करने वाला राज्य है, वहीं दूसरी तरफ यहाँ की जनता को बिजली कटौती, अत्यधिक लोड शेडिंग, महंगे बिल और अब निजीकरण की मार झेलनी पड़ रही है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि सीएसईआरसी में दाखिल याचिका क्रमांक 89/2026 के तहत टाटा पावर के लाइसेंस आवेदन को तुरंत निरस्त किया जाए। यदि भाजपा सरकार ने अपने इस जनविरोधी फैसले को लेगी और छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक बिजली संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश करेगी, तो कांग्रेस पार्टी रायपुर की सड़कों से लेकर विधानसभा तक उग्र आंदोलन करेगी और जनता के हक की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी। याचिका अधिवक्ता शशांक मिश्रा, शुभेंद्रु प्रकाश राय, संतोष कुमार के माध्यम से लगाया गया।


