शक्कर, तेल, प्याज, खाद्य सामग्री की महंगाई से त्योहार कैसे मनाये -कांग्रेस

शक्कर, तेल, प्याज, खाद्य सामग्री की महंगाई से त्योहार कैसे मनाये -कांग्रेस
शक्कर, तेल, प्याज, खाद्य सामग्री की महंगाई से त्योहार कैसे मनाये -कांग्रेस

रायपुर/06 नवंबर 2026। 
दीपावली के त्योहार में राशन शक्कर एवं खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों ने त्योहार का मजा फीका कर दिया। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आम आदमी त्योहार कैसे मनाये? मोदी राज में महंगाई बेतहाशा बढ़ी, गरीब और मध्यम वर्ग परेशान है तथा त्योहारी सीजन में महंगाई से आम आदमी का बजट बिगड़ गया है। कुछ दिनों में शक्कर की कीमत में 40 से 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। खाद्य तेल के दाम दुगुने हो गये है। प्याज 50 रू. किलो पहुंच गया है। आम गृहणी की रसोई की बजट बिगड़ गया है। अच्छे दिनों का वादा कर सरकार में आई मोदी सरकार ने आम आदमी को महंगाई से परेशान कर रखा है। दाल की कीमते दोगुनी हो गई है, लहसुन 400 किलो, आलू, प्याज, टमाटर एवं सब्जियों के दाम आसमान छू रहे है। दालों की कीमते दुगुनी हो गयी है। दूध, दही, पनीर, आटा, मैदा, सूजी, दहलन-तिलहन, कपड़े जैसे दैनिक उपभोग की तमाम वस्तुओं के दाम बढ़ गये है। दवाओं और अस्पतालों तक में इलाज महंगा हो गया है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, घटते इनकम से लोग परेशान हैं, वहीं दैनिक उपभोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जनता परेशान है।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है, महंगाई से देश के नागरिकों की कमर टूटती जा रही है। 2014 में जो गैस का सिलेंडर 410 रू. का था, आज वह 1000 रू. के पार है वह भी मिल नहीं रहा। पेट्रोल के दाम 70 रू. प्रति लीटर से बढ़कर 108 रू. प्रति लीटर के पार हो गए है, जबकि डीजल के दाम 55 रू. प्रति लीटर से बढ़कर 104 रू. प्रति लीटर के करीब पहुंच गए है। मोदी राज मेें महंगाई बेलगाम आम आदमी का बजट बिगड़ गया है।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आज मध्यमवर्गीय परिवार अपनी आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बनाने के लिए बहुत अधिक संघर्ष कर रहे हैं। गरीब परिवारों के सामने घर चलाने की चुनौती है। महिलाओं को रसोई का बजट संभालने के लिए जरूरी सामान में कटौती करनी पड़ रही है। आखिर आम जनता अपनी जरूरतों से कब तक समझौता करेगी? भाजपा सरकार चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन महंगाई पर नियंत्रण करने के सवाल पर मौन क्यों है? क्या सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ चुनावी वादे करना है या जनता को महंगाई से राहत देना भी है? आम जनता की आमदनी बढ़ती नहीं लेकिन महंगाई बढ़ती जा रही है। बेलगाम महंगाई को रोकने के लिये सरकार के पास कोई नियत है और ना नीति है।