पोंगल त्योहर की अहमियत पर बात करते हुए PM मोदी ने कहा, 'पोंगल अब एक वैश्विक त्योहर बन चुका है.

पोंगल त्योहर की अहमियत पर बात करते हुए PM मोदी ने कहा, 'पोंगल अब एक वैश्विक त्योहर बन चुका है.

पोंग्ल वैश्विक त्योहर बन गया: मोदी

पोंगल त्योहर की अहमियत पर बात करते हुए PM मोदी ने कहा, 'पोंगल अब एक वैश्विक त्योहर बन चुका है. पूरी दुनिया में तमिल समुदाय और जो लोग तमिल संस्कृति को पसंद करते हैं, इसे बहुत उत्साह से मनाते हैं. मुझे उनमें से एक होने पर गर्व है.'

PM मोदी ने आगे कहा कि पोंगल हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने का महत्व सिखाता है. यह किसानों की कड़ी मेहनत का जश्न है और हमें धरती, मिट्टी की सेहत, जल संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग की याद दिलाता है. उन्होंने मिशन लाइफ, 'एक पेड़ मां के नाम' और अमृत सरोवर जैसे अभियानों का जिक्र किया, जो पर्यावरण संरक्षण की इसी भावना को आगे बढ़ाते हैं.

पोंगल उत्सव क्या है?

पोंगल त्यौहार मुख्य रूप से 14 से 17 जनवरी तक मनाया जाता है, जिसमें भोगी पोंगल, सूर्य पोंगल (थाई पोंगल- मुख्य दिन), मट्टू पोंगल (गाय-बैलों की पूजा) और कानूम पोंगल शामिल हैं. यह मकर संक्रांति के आसपास आता है और भारत की समृद्ध कृषि परंपराओं का प्रतीक है. यह तमिलनाडु का प्रमुख फसल उत्सव है, जो प्रकृति, सूर्य देव, पशुधन और किसानों के लिए आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है.

पोंगल के दौरान मुख्य रूप से नए चावल से पारंपरिक व्यंजन पकाए जाते हैं. इनमें मीठा नमकीन शामिल होते हैं. इनके साथ नारियल चटनी, सांभर, वड़ा, पायसम, केला और मौसमी फल परोसे जाते हैं. मीठी और नमकीन को परंपरा के मुताबिक खुली जगह में मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है. दूध-चावल के उफनने को समृद्धि का शुभ संकेत माना जाता है.