डोंगरगढ़ में सुशासन त्यौहार के मंच पर चाकूबाजी यही है, सुशासन का हकीकत - दीपक बैज

डोंगरगढ़ में सुशासन त्यौहार के मंच पर चाकूबाजी यही है, सुशासन का हकीकत - दीपक बैज
डोंगरगढ़ में सुशासन त्यौहार के मंच पर चाकूबाजी यही है, सुशासन का हकीकत - दीपक बैज


रायपुर/18 मई 2026।
 डोंगरगढ़ ब्लॉक में सुशासन त्यौहार के मंच पर भाषण दे रहे सरपंच को चाकू मार दिया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह विष्णु के सुशासन की हकीकत है। प्रदेश में कहीं पर कोई आदमी सुरक्षित नहीं है। सुशासन त्यौहार के मंच पर जहां पूरा प्रशासनिक अमला था, वहां पर सरपंच को चाकू मारा जा रहा है। दरअसल प्रदेश में सरकार नाम की चीज नहीं है और पूरी सरकार सुशासन त्यौहार मना रही है।

 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार के सुशासन त्यौहार पर जनता को भरोसा नहीं है इसीलिए लोग अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के कार्यक्रमों में आना नहीं चाह रहे है। पिछले बार सुशासन त्यौहार में लोगों ने जो आवेदन दिया था उसका निराकरण नहीं हुआ तथा जनता के आवेदनों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया था, इसीलिए जनता का सरकार पर से भरोसा उठ गया है, जो सुशासन त्यौहार में साफ दिख रहा है। मुख्यमंत्री सचिवालय पहले से पटकथा लिखकर मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण के कार्यक्रम को प्रायोजित किया जाता है जो जिसमें जनता की कोई रुचि नहीं रहती है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश में सरकारी काम ठप्प पड़े है, अकेलो तहसीलो और अनुविभागों में नामांकन बंटवारा फौती नक्शा, नक्शा खसरा बंटवारा के 8 लाख से अधिक प्रकरण पेंडिंग है। यदि सरकार में सुशासन होता तो लोगो का काम नियमित हो रहा होता, तो त्यौहार मानाने की जरूरत क्यों पड़ती? यह सुशासन त्यौहार अपनी विफलता से ध्यान भटकाने का तरीका है। पिछले बार भी सुशासन त्यौहार मनाये थे और जनता से जो लाखो आवेदन प्राप्त हुए उसको कचरे के ढेर में फेंक दिए। इस बार के सुशासन त्यौहार के पहले पिछले साल के आवेदनो के बारे में जनता को बताये उनका अभी तक निराकरण क्यों नहीं हुआ?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सुशासन का दंभ भरने वाली साय सरकार के राज में आम आदमी छोटे-छोटे काम के लिये सरकारी दफ्तरों का चक्कर काटने को मजबूर है। पटवारी कार्यालय से लेकर तहसील दफ्तरों में लोगों के नामांतरण, फौती, त्रुटि सुधार के लाखों आवेदन लंबित है, लोगों के काम नहीं हो रहे, आम आदमी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर है। बेहद दुर्भाग्यजनक है कि लाखों लोगों को सरकार के पास सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसे रोजमर्रा के कामों के लिये आवेदन देने सरकार के सुशासन तिहार का इंतजार करना पड़ता है। साय सरकार लोगों के मूलभूत काम को भी नहीं कर पा रही है।