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  • एक निजी समाचार चैनल और सोशल मीडिया साइटों द्वारा अविश्वसनीय, फर्जी, अपमानजनक और आधारहीन समाचार और सूचना का प्रसारण*
    रायपुर, 05 मार्च 2020/ रायपुर में आयकर विभाग के छापे के संदर्भ में आज प्रसारित की जा रही खबर पूरी तरह से निराधार और फर्जी है। एक निजी समाचार चैनल द्वारा इस संबंध में प्रसारित समाचार रिपोर्ट में मुख्यमंत्री सचिवालय के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर कई झूठे आरोप लगाया गया। जबकि आयकर विभाग ने 2 मार्च 2020 को जारी अपने बयान में इन आरोपों के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं किया है। यह स्पष्ट रूप से इस तथ्य को साबित करता है कि उपरोक्त निजी समाचार चैनल इसे छत्तीसगढ़ सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त छवि को खराब करने के अवसर के रूप में उपयोग कर रहा है। उपरोक्त समाचार रिपोर्ट पूरी तरह से अविश्वसनीय, फर्जी, आधारहीन, गलत और प्रमाणहीन है। आयकर छापे के दौरान निजी न्यूज चैनल ने छत्तीसगढ़ सरकार और सरकारी अधिकारियों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए जानबूझकर फर्जी खबरें प्रसारित की। विषय को सनसनीखेज बनाने के उद्देश्य से तथ्यों को पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया। उपरोक्त समाचार चैनल द्वारा की गई रिपोर्टिंग उद्देश्यपूर्ण और निष्पक्ष होने के बजाय, अपमानजनक और पक्षपातपूर्ण थी। उपरोक्त खबर के संबंध में राज्य सरकार का बयान न तो प्रसारण से पहले मांगा गया था और न ही पत्रकारिता के पेशे की पवित्रता को कायम रखा गया। चैनल ने उच्चतम टीआरपी हासिल करने के लिए पेशे के आदर्शोंं को ताक में रख दिया। समाचार चैनल ने व्यावसायिकता की सीमाओं का उल्लंघन किया। यह एक प्रकार का मीडिया ट्रायल बना, जिसका एकमात्र उद्देश्य पत्रकारिता की नैतिकता के साथ समझौता करके दर्शकों को गुमराह करना था। चैनल द्वारा झूठी खबर को प्रसारित करने पर छत्तीसगढ़ सरकार उपरोक्त चैनल के खिलाफ उपयुक्त प्रेस फोरम में शिकायत कर रही है।
  • महिला सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बंद हो:  पूजा विधानी

    रायपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश श्रीमती पूजा विधानी ने महिला सुरक्षा के मोर्चे पर प्रदेश सरकार को फिसड्डी करार दिया है। श्रीमती विधानी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं के साथ हुए अपराधों का आंकड़ा पेश करके अपनी विफलता को स्वीकार किया है। महिलाओं से जुड़े हर मुद्दों पर प्रदेश सरकार विफल साबित हुई है।
    भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती विधानी ने कहा कि विधानसभा में प्रदेश के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू द्वारा प्रस्तुत जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक एक जनवरी 2019 से 31 जनवरी 2020 तक की अवधि में प्रदेश में बलात्कार के 2575 मामले दर्ज होना प्रदेश के लिए शर्म का विषय है। महिलाओं के उत्थान व सशक्तिकरण के बड़े-बड़े ढोल पीटने वाली सरकार महिलाओं की गरिमा और आत्मसम्मान तक को अपराधियों के हाथों सौंपकर भी बेचैन नहीं हो रही है, यह प्रदेश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। हैरत की बात तो यह है कि राजधानी व रायपुर जिले में इस अवधि में ही सर्वाधिक 301 मामले बलात्कार के दर्ज हुए हैं। श्रीमती विधानी ने कहा कि छत्तीसगढ़ को मौजूदा कांग्रेस सरकार अपराधगढ़ बनाने पर आमादा है जहां हर अपराध अब एक उद्योग की शक्ल लेता जा रहा है। बलात्कार, डकैती, लूट, हत्या, अपहरण, चोरी के जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक इस सरकार के इन 13 महीनों के कार्यकाल में 17,009 मामले पुलिस ने दर्ज करके कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा के सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। अपराधों के ये आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि पुलिस तंत्र को कानून-व्यवस्था के बजाय अपनी बदलापुर-राजनीति में इस्तेमाल करके प्रदेश सरकार सबके साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर रही है।

  • भाजपा के सभी नेताओं ने बजट को बताया निराशाजनक - किया विपक्ष धर्म का पालन

    दिशाहीन एवं निराशाजनक बजट: विक्रम उसेंडी


    रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने राज्य सरकार के बजट को दिशाहीन और निराशाजनक बताया है। श्री उसेंडी ने कहा कि राज्य सरकार के इस बजट में कांग्रेस के जनघोषणा पत्र की कोई झलक दिखाई ही नहीं दे रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि पहले बजट से छत्तीसगढ़ देश में 15 से 21 स्थान पर फिसला अब दूसरे बजट से कहा पहुंचेगा पता नहीं?
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री उसेंडी ने कहा कि आर्थिक प्रबंधन के मोर्चे पर प्रदेश सरकार का यह बजट वैचारिक दिशाहीनता और नेतृत्व की विफलता का श्वेत पत्र है जिसमें प्रदेश को विभिन्न योजनाओं का झुनझुना थमाकर लोगों को जरूरतों और जरूरी विकास कार्यों की अनदेखी कर दी गई है। इस बजट में न औद्योगिक क्षेत्रों के लिए कुछ नया विजन है और न ही सबसे विकसित प्रदेश होने की तैयारी। श्री उसेंडी ने कहा कि धान खरीदी के मोर्चे पर बुरी तरह विफल रही प्रदेश सरकार के पास कृषि के नवीनीकरण की कोई योजना तो है ही नहीं, किसानों के स्थायी कल्याण और उनकी खेती व अर्थतंत्र को मजबूत व लाभप्रद बनाने का कोई भी दृष्टिकोण नजर नहीं आ रहा है। खेती की सिंचाई के लिए भी जो घोषणाएं बजट में की गई हैं, आधे-अधूरे मन से की गई हैं। नरवा-गरवा-घुरवा-बारी जैसी अपनी ही योजना के प्रति प्रदेश सरकार कोई ठोस काम करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखा पा रही है।
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री उसेंडी ने कहा कि शिक्षा जगत हो या सामाजिक कल्याण, युवा कल्याण, किसी भी मोर्चे पर सरकार काम करने की इच्छा-शक्ति से शून्य नजर आ रही है। शराबबंदी के वादे पर प्रदेश सरकार फिर मौन साधे बैठ गई है। सुपोषण का ढोल पीट रही सरकार ने कुपोषण से मुक्ति के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं किया है। स्वास्थ्य योजनाओं के नाम पर भी प्रदेश सरकार का यह बजट छत्तीसगढ़ को बेहतर स्वास्थ्य और मरीजों को राहत की गारंटी देता नहीं दिख रहा है। श्री उसेंडी ने कहा कि कुल मिलाकर बजट के नाम पर प्रदेश सरकार ने केन्द्र सरकार से मिलने वाले राज्यांश को ही बजट प्रावधान बनाकर प्रदेश को भरमाने और बजट के नाम पर खानापूर्ति करने का काम किया है।

    न विकास की आहट, न रोजगार की राहत: डॉ. रमन 

    भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज पेश राज्य के बजट को घोर निराशाजनक करार देते हुए कहा है कि इस बजट ने राज्य की जनता के सपने तोड़कर रख दिए। बड़े-बड़े वादे करने वालों के असल इरादे इस बजट ने जाहिर कर दिये हैं जिसमें न तो विकास की आहट सुनाई दे रही है और न ही रोजगार की राहत नजर आ रही है। बजट में सभी तबकों को छला गया है। सरकार का नरवा गरुवा मॉडल भी बुरी तरह फेल हो गया है। अब सारे वादों की हकीकत उजागर हो गई है। बजट प्रावधानों में न तो अधोसंरचना विकास का कोई खाका नजर आ रहा है, न ही कौशल उन्नयन के लिए सरकार की इच्छा-शक्ति दिख रही है। कृषि, रोजगार, शिक्षा, महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सरकार का नजरिया बदनीयती भरा नजर आ रहा है। महिला के सशक्तिकरण एवं उनकी सुरक्षा के साथ ही शराबबंदी के मामले में सरकार एक बार फिर प्रदेश और महिलाओं को छलने का काम कर रही है।

    छत्तीसगढ़ राज्य का बजट निराशाजनक है
     
    बजट से न तो प्रदेश के युवाओ को कोई रोजगार मिलेगा न ही प्रदेश के किसी वर्ग को कोई लाभ
    भाजपा अजजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद रामविचार नेताम ने कहा कि घोषणा पत्र में 10 लाख बेरोजगार युवाओ को मासिक भत्ता, सुपेबेड़ा, सरगुजा, बस्तर को एयर एम्बुलेंस की सेवा से जोड़ना, छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बदलना, महिला सुरक्षा के नाम पर विशेष महिला पुलिस स्टेशन बनाना, दैनिक मजदूरों के लिए सुरक्षित आय सुनिश्चित करने के साथ राज्य के लोगो को बिजली बिल हाफ करने जैसे वादों को पूर्ण न करना राज्य की जनता के साथ धोखा है। प्रदेश कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2020-21 के बजट में इन मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं की है और राज्य की जनता के विश्वास को तोड़ा है, जिसकी कीमत प्रदेश सरकार को चुकानी पड़ेगी।

    दीया न तेल, केवल नाउम्मीदी का खेल: कौशिक 

    प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने बजट पर प्रक्रिया व्यक्त करते कहा कि इस पूरे बजट में कहीं भी छत्तीसगढ़ के आम जनों की चिंता नहीं की गई है। इस बजट को लेकर यही कहा जा सकता है कि दीया है न तेल है केवल नाउम्मीदी का खेल है। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि कांग्रेस की सरकार अपने घोषणा पत्र में किये गये वादों को भी पूरा करने में नाकाम है। शराबबंदी को लेकर कुछ भी नहीं किया गया है। जिन वादों के साथ कांग्रेस सत्ता में आयी है उन्हीं वादों से मुकर रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को निराशा हाथ लगी है। उद्योगों के लिये कुछ भी खास नहीं है। आधारभूत संरचना को मजबूत करने के दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। निवेश की संभावनाएं शून्य हैं। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा की कोई चिंता नहीं की गई है। नेता प्रतिपक्ष श्री कौशिक ने कहा कि गरीब, मजदूर, किसान, युवाओं को बजट में ठगा गया है। बजट पूरी तरह से कोरी कल्पनाओं पर केंद्रित है। विकास की सोच से कोसों दूर है। उन्होंने कहा कि ये छत्तीसगढ़ में वादाखिलाफी का सबसे बड़ा बजट है। कांग्रेस सरकार ने पूरी तरह से असफल बजट पेश किया है।

    दिए जाने वाले राज्यांश को ही भूपेश सरकार ने बजट बताया
     
    भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने, श्रीचंद सुन्दरानी, संजय श्रीवास्तव ने राज्य के बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह कैसा बजट है जो केवल केन्द्र की योजनाओं में राज्य द्वारा दिए जाने वाले राज्यांश की घोषणा मात्र है। आज फिर भूपेश सरकार ने युवाओं व महिलाओं को निराश करने का काम किया है। जनघोषणा पत्र में बड़े-बड़े वादे कर सत्ता में आई कांग्र्रेस उसे पूरा करने के लिए संजीदा नही है। जनघोषणा पत्र इस बजट के बाद केवल जनता के लिए धोखा पत्र साबित हुआ है।

    युवकों के लिए निराशाजनक: शर्मा

    भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष विजय शर्मा ने कहा कि इय बजट की तरफ छत्तीसगढ़ के युवा बड़ी आशा भरी निगाहों से देख रहे थे। परन्तु इस बजट में नई नौकरियों के लिए कोई प्रयास नहीं दिखता और न ही  25 सौ रुपए बेरोजगारी प्रोत्साहन भत्ता के लिए कोई प्रावधान है। यह बजट थोथा चना बाजे घना के समान है। भूपेश सरकार इतनी जल्दी जिस प्रकार एक वर्ष में अलोकप्रिय हुई है। यह बजट राज्य सरकार की अलोकप्रियता में और इजाफा करेगा। जिस बजट से उन्हीं के मंत्रिमंडल के सदस्य 10 के 7.5 अंक दे रहे है, उस बजट में प्रदेश के विकास की किरण देखना बेमानी है। ।

    महिलाओं के मुद्दों पर सरकार चुप: पूजा विधानी

    भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष पूजा विधानी ने प्रदेश सरकार के बजट पर आश्चर्य व्यक्त किया है। श्रीमती विधानी ने कहा कि महिलाओं के उत्थान, सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए बजट में प्रदेश सरकार की चुप्पी आश्चर्यजनक है। बजट का अधिकांश हिस्सा तो ऋण चुकाने में ही चला जाएगा तो 21 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ में कराहते प्रदेश के सर्वांगीण विकास की उम्मीद तो इस प्रदेश सरकार से बेमानी ही है। श्रीमती विधानी ने कहा कि शराबबंदी के बजाय शराब की तीन नई फैक्टरी खोलने की घोषणा कर सरकार ने अपनी मंशा पहले ही जाहिर कर थी और अपने वादे के मुताबिक महिला स्व-सहायता समूहों की कर्ज माफ करने के मामले में इस बार भी प्रदेश सरकार ने कोई प्रावधान नहीं किया है।
  • छत्तीसगढ़ में फेरोएलॉय लौह अयस्क उत्पादक संकट में  - आईएफएपीए

    आईएफएपीए ने छत्तीसगढ़ में फेरोएलॉय लौह अयस्क उत्पादकों के लिए दर्शाई चिंता 

    जल्द ठोस कदम ना उठाए तो होगा गंभीर नुकसान

     कच्चे माल के उपलब्ध ना होने - आयात के सस्ते होने तथा हाई पावर टेरिफ की वजह से इकोसिस्टम को हुआ नुकसान


    रायपुर 3 मार्च इंडियन फेरोएलॉय प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन आईएफएपीए ने छत्तीसगढ़ के फेरोएलॉय उद्योग की स्थिति को लेकर चिंता जताई है - मलेशिया से फेरोएलॉय के सस्ते आयात व अन्य कारणों को लेकर उपजी इस चिंता के कारण आईएएएपीए द्वारा सरकार से निवेदन किया गया है कि वह छत्तीसगढ़ में  5500 करोड़ मूल्य के फेरोएलॉयज उद्योग की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जल्द ठोस कदम उठाएं।

    उल्लेखनीय है कि सस्ते आयात की वजह से स्थानीय विकल्पों की ओर से व्यवसायियों का ध्यान हट रहा है और यह मुख्य चिंता का विषय है।
     छत्तीसगढ़ में फेरोएलॉयज निर्माताओं को जिन अन्य समस्याओं चुनौतियों का सामना करना पड़ता है उनमें -  मैग्नीज ओर की पूर्ति का लगातार ना होना -- लैंड लॉक की समस्या, वैजाग, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे बंदरगाहों के समीप स्थित उद्योगों की तुलना में यहां मैंगनीज का आयात महंगा है । कोयले के दाम अधिक होना - हालांकि छत्तीसगढ़ में मौजूद अधिकांश उद्योगों के पास उनके खुद के कैपटिव पावर प्लांट, खुर्द का उर्जा स्त्रोत हैं ।
    महंगा और अपर्याप्त पावर टेरिफ, केवल उन निर्माताओं को राज्य सरकार द्वारा कुछ सब्सिडी दी गई है जिनके पास कैपटिव पावर नहीं ह।


    इस बारे में बात करते हुए इंडियन फेरो एलॉयज प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के चेयरमैन मनीष शारडा ने बताया कि फेयरवेल एलॉय उद्योग पिछले 5 सालों से लगातार मंदी का सामना कर रहा है द्य परिणाम स्वरूप इस उद्योग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण निर्माताओं पर उनकी यूनिट को बंद कर देने का दबाव बन रहा है।

    मलेशिया ने अपने फेरो एलॉयज मैन्युफैक्चरर्स के लिए बिजली में सब्सिडी प्रदान की है, इसके कारण मलेशिया से होने वाले मेंगनीज एलाए के आयात की बढ़ोतरी से आगे घरेलू व्यवसायियों की लाभप्रदता के और कम होने की आशंका है।
     मनीष शारडा ने कहा कि भारत फेरो एलाइ निर्माता एसोसिएशन सरकार से अपील करती है कि वे फिनिश्ड एलाय पर इंपोर्ट ड्यूटी के अधिभार के जरिए कच्चे माल के आयात पर ड्यूटी को घटाकर और कम दामों में बिजली उपलब्ध करवाकर घरेलू उद्योग के लिए भी समान स्तर पर कार्य का अवसर दें - ताकि भारत भारतीय फेरो एलॉय उद्योग भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सके।

    उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ फेरोएलॉय उद्योग तकरीबन 5500 करोड़ रुपए का टर्नओवर करता है और यह जीएसटी के रूप में सालाना करीब 1000 करोड़ रुपए राज्य सरकार को चुका रहा है। यह उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 75000 लोगों को रोजगार देता है जिसमें हर वर्ष करीब 10ः की वृद्धि होती है भारत में फेरो एलॉय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मलेशिया से आयात होता है, जहां  उत्पादन बहुत कम कीमत में होता है द्य गौर करने लायक बात यह है कि फेरोएलॉय का निर्माण करने के लिए बिजली एक प्रमुख कारक होता है और यह उत्पादन की कुल लागत का करीब 40 से 70ः होता है द्य फेरो एलॉय निर्माता के लिए अन्य देशों की तुलना में भारत में पावर टेरिफ अधिक है , कम पावर टेरिफ के साथ मलेशिया से मैग्नीज ऐलॉय के आयात से आगे जाकर घरेलू व्यवसायियों की लाभप्रदता के और कम होने की आशंका है।

     इंडियन फेरोएलॉय प्रोड्यूसर एसोसिएशन के अनुसार भारत करीब 2 पॉइंट 4 8 मिलियन टर्न मैग्नीज फेरोएलॉय उत्पन्न करता है और 100000 से भी अधिक लोगों को रोजगार देता है।
    घरेलू मांग में कमी के चलते भारत करीब 60ः में मैगनीज फेरोएलॉय का उपयोग करने में सक्षम है और बचा हुआ 40ः निर्यात कर दिया जाता है , जिससे 7000 करोड रुपए की विदेशी मुद्रा की कमाई होती है।

     

    आई ए एस ए पी ए यानी इंडियन फेरोएलॉय प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की स्थापना 1961 में बल्क और नोबेल दोनों तरह के फेरोएलॉय के हितों के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सहायक इंडस्ट्री के तौर पर की गई थी ताकि वह घरेलू स्टील उद्योग की बढ़ती मांग की पूर्ति कर सकें आज आई एफ ए पी ए देश में बल और नोबेल फेरोएलॉय के मैन्युफैक्चरर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली अपेक्स बॉडी बन गई है आज की गणना के हिसाब से सारे फेरोएलॉय उत्पादकों को मिलाकर इसके 100 सदस्य हैं जिनमें इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस इस मेल्टिंग प्रोसेस तथा नोबेल फेरोएलॉय निर्माता शामिल है जो कि एल्यूमिनोथर्मिक प्रक्रिया का उपयोग करते हैं।

    इस पत्रकार वार्ता में एसोसिएशन के चेयरमैन मनीष शारडा, प्रेम खंडेलवाल, सीवी दुर्गा प्रसाद और मनोज अग्रवाल मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सीजी 24 न्यूज

  • सीएए के खिलाफ चल रहे आंदोलन को शासन - प्रशासन ने करवाया समाप्त
    *राजधानी ब्रेकिंग न्यूज़* *CAA के खिलाफ चल रहे आंदोलन को प्रशासन ने कराया बंद -बड़ी खबर* छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्तंभ चौक में पिछले कई दिनों से चल रहे सीएए के खिलाफ चल रहे आंदोलन को आज शासन - प्रशासन ने समाप्त करवा दिया - धरना स्थल पर राजधानी की सभी थानों की पुलिस सहित वरिष्ठ अधिकारी अनेक बसों के साथ उपस्थित हुए | आंदोलनकारियों द्वारा विवाद की स्थिति उत्पन्न किए जाने के बावजूद प्रशासन ने उनकी एक नहीं सुनी और सभी महिलाओं सहित पुरुषों को धरना स्थल से खदेड़ दिया प्रशासन का कहना है कि यह धरना बिना अनुमति के चल रहा था अब देखना यह है कि संबंधित आंदोलनकारी अगला क्या कदम उठाते हैं सीजी 24 न्यूज़ रायपुर
  • परिवहन आयुक्त का तुगलकी फरमान गया रद्दी की टोकरी में -

    सुप्रीम कोर्ट के नियमों को ताक पर रखकर जारी किया था फरमान - 

    क्या था वह फरमान और क्यों गया वह रद्दी की टोकरी में ?

     

     

    छत्तीसगढ़ के परिवहन आयुक्त डॉ कमलप्रीत सिंह द्वारा 22 फरवरी को जारी किए गए फरमान जिसमें सभी परिवहन अधिकारियों के माध्यम से वाहन डीलरों को 29 फरवरी तक बिक्री किए गए समस्त वाहनों के संपूर्ण दस्तावेज परिवहन कार्यालयों में जमा करवाने की हिदायत दी गई थी |
     इस फरमान के पीछे का कारण यह था कि 1 अप्रैल 2020 से bs4 वाहनों का पंजीयन प्रतिबंधित हो जाएगा, 31 मार्च 2020 तक बिक्री हुए bs4 के वाहन जो 31 मार्च से पहले तक रजिस्ट्रेशन करवा लेंगे वहीं वाहन सड़कों पर चल सकेंगे |

    परिवहन आयुक्त डॉक्टर कमलप्रीत सिंह ने फरमान जारी करने के पीछे का कारण वाहनों के पंजीयन का अत्यधिक दबाव होना बताकर कर्मचारियों के बोझ को कम करने की बात कही थी, जबकि नियमानुसार 31 मार्च तक बिक्री हुए समस्त वाहनों का पंजीयन करना अधिकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी है 

     अब ऐसे में एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कर्मचारियों के बोझ की चिंता कर कानून का उल्लंघन करना कहां तक उचित है |
     जबकि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि 31 मार्च तक बिके वाहनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से किया जाना है और एक अप्रैल से bs4 वाहनों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से प्रतिबंधित हो जाएगा |

     परिवहन आयुक्त के इस फरमान को चुनौती देते हुए वाहन डीलरों ने परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर के पास अपनी बात रखी और इस फरमान को निरस्त करने की मांग की |
     वाहन डीलरों की मांग पर गौर करते हुए परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने नियमानुसार 30 मार्च तक वाहन बेचने को उचित करार देते हुए परिवहन आयुक्त के 29 फरवरी तक के फरमान को निरस्त कर दिया |

  • नव दम्पत्तियों ने सात वचनों के साथ कुपोषण और कन्या भ्रूण हत्या रोकने की ली शपथ

    रायपुर : सामूहिक कन्या विवाह समारोह में 518 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नव दम्पत्तियों को दिया आशीर्वाद

     

     

    नव दम्पत्तियों ने सात वचनों के साथ ली कुपोषण और कन्या भ्रूण हत्या रोकने की शपथ
     
    सम्पूर्ण रीति-रिवाज के साथ कम खर्चे में पूरी भव्यता के साथ हुआ सामूहिक विवाह

    वैदिक मंत्रोचार, धूप-दीप की सुगंध और शहनाई से गुंजाएमान रहा आयोजन

        रायपुर, 25 फरवरी 2020

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में आज साईंस कॉलेज मैदान में नव दम्पत्तियों ने सात वचनों के साथ कुपोषण और कन्या भ्रूण हत्या रोकने की शपथ ली। मुख्यमंत्री ने सामूहिक कन्या विवाह समारोह में सभी नवदम्पत्तियों को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर 518 कन्याओं का विवाह सम्पन्न हुआ। मुस्लिम और इसाई धर्म के तीन-तीन जोड़ों का भी मौलवी और पादरी ने अपने-अपने रीति-रिवाज से विवाह सम्पन्न कराया। इन जोड़ों के साथ चार दिव्यांग जोड़ों ने भी सामूहिक विवाह में सात फेरे लेकर जीवन भर साथ रहने का वचन दिया। नव दम्पत्तियों ने सात फेरों और सात वचनों के साथ ही भू्रण हत्या का विरोध, बेटी के प्रति भेद-भाव नहीं करने, बेटी का स्वाभिमान एवं गौरव बनाए रखने की भी शपथ ली। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने नवविवाहितों को बधाई और शुभकामनाएं दी और उनके सुखमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि सामूहिक विवाह एक पुनीत कार्य है। हर माता-पिता को अपने बच्चों की शादी की चिंता होती है। आज के समय में शादी में लाखों रूपए खर्च हो जाते हैं। माता-पिता को शादी के लिए उपयुक्त वर-वधु मिलने के साथ ही शादी के खर्च की चिंता रहती है। सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से कम खर्चे में शादी की सामग्री, पण्डाल, भोजन के साथ ही विधिवत तरीके से विवाह संस्कार सम्पन्न हो जाता है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडि़या, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा, विधायकगण, महापौर ने भी नव दम्पत्तियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।

        मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कभी भी दहेज प्रथा नहीं रही है। आशीर्वाद स्वरूप टिकावन के रूप में वधु के नये दाम्पत्य जीवन की शुरूआत के लिए जरूरी सामग्री दी जाती है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा 15 हजार रूपए को बढ़ाकर 25 हजार रूपए कर दिया गया है। इस राशि से 20 हजार की उपहार सामग्री तथा पांच हजार रूपए विवाह आयोजन व्यवस्था पर खर्च की जाती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी जोड़ों को एक-एक पौधा, सुपोषण टोकरी, एक हजार रूपए का चेक सहित अनिवार्य विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र और दैनिक जीवन के उपयोगी की सामग्री भी प्रदान किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी हाना ‘घर बना के देख, बिहाव करके देख’ कहते हुए विवाह को एक जिम्मेदारी बताया। मुख्यमंत्री ने सामूहिक विवाह को लेकर नजरिया और भाव बदलने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि ‘सोच बदलो सितारे बदल जाते हैं, नजरे बदलो नजारे बदल जाते हैं’। मुख्यमंत्री ने सामाजिक बुराईयों के खिलाफ जन चेतना लाने तथा पूरी रस्मों-रिवाज एवं वैदिक मंत्रों के साथ शादी सम्पन्न कराने पर गायत्री परिवार को बधाई और शुभकामनाएं दी।
        
        महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडि़या ने वर-वधुओं को नये जीवन की शुरूआत के लिए आशीर्वाद देते हुए मंगलकामना की। श्रीमती भेंडि़या ने कहा कि विवाह में होने वाले व्यापक खर्च और व्यवस्था की जरूरत होती है। इस देखते हुए श्री भूपेश बघेल ने वर्ष 2002 में रायपुर के आर.डी. तिवारी स्कूल में 22 जोड़ों की शादी कराकर सामूहिक विवाह की शुरूआत की थी। उन्होंने 2003 में सेलूद में 27 जोड़ों का विवाह करवाया। सामूहिक विवाह की महत्ता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की राशि को बढ़ाकर 25 हजार रूपए कर दिया है। इसी तरह दिव्यांग जोड़ों के विवाह पर दी जानी वाली राशि को बढ़ाकर एक लाख रूपए कर दिया है। श्रीमती भेंडि़या ने नव विवाहितों से कुपोषण मुक्त स्वस्थ छत्तीसगढ़ बनाने में योगदान देने की अपील की।
        
        राज्य में पहली बार सामूहिक विवाह स्थल पर ही जोड़ों का विवाह पंजीयन नगर निगम रायपुर द्वारा किया गया। इस अवसर पर विधायक कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, श्रीमती अनिता योगेन्द्र शर्मा, श्रीमती संगीता सिन्हा, सुश्री शकुंतला साहू, श्रीमती ममता चन्द्राकर, श्रीमती रश्मि सिंह, पूर्व महापौर श्रीमती किरणमयी नायक, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी एवं संचालक जन्मेजय महोबे, कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और वर-वधुओं के परिजन उपस्थित थे।

  • छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक 29 फरवरी को सतरेंगा में : जल पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

    रायपुर : कैबिनेट की बैठक 29 फरवरी को सतरेंगा में : सतरेंगा में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

     

     


       रायपुर, 25 फरवरी 2020

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक 29 फरवरी को दोपहर एक बजे से कोरबा जिले के सतरेंगा में होगी। कोरबा जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूरी पर हसदेव बांगो के किनारे बसे सतरेंगा को साहसिक और जल पर्यटन स्थल के रूप विकसित किया जा रहा है। सतरेंगा के बांध में पानी के ऊपर तैरता हुआ पुल बनाया गया है। इस पुल से चलकर पहाड़ियों पर पहुंचा जाता है।
        ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हसदेव नदी पर बांगो बांध का निर्माण किया गया हैै। यह छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे बड़ी एवं पहली बहुउद्देश्यीय जल परियोजना है। यह बांध मध्यभारत के सबसे विशालतम बांधों की श्रेणी में से एक है। पहाड़ियों से घिरे इस बांध के बीचों-बीच कई छोटे द्वीप है जो इसके सौंदर्य को बढ़ा देती हैं।
        छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हसदेव बांगो के किनारे बसे सतरेंगा, बुका एवं गोल्डन आइलैण्ड को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए परियोजना तैयार की गई है। इस स्थान को साहसिक पर्यटन एवं जल पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है।
        सतरेंगा के वन परिक्षेत्र में अनेक प्रकार की वनौषधियां भी है जिसका उपयोग प्राकृतिक उपचार एवं दवा के रूप में किया जाता है। इसी गांव में 1400 साल पुराना विशाल साल वृक्ष भी है। यहां का महादेव पहाड़ प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। सतरेंगा के निकट देवपहरी का प्रसिद्ध जलप्रपात भी है। इस परिक्षेत्र में अनेक पुरातात्विक धरोहर का आकर्षण भी है, जिसमें शैलचित्र प्रमुख है।
        राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में पहली बार योजनाबद्ध तरीके से जल-पर्यटन को बढ़ावा देने एवं स्थानीय निवासियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय विकास के उद्देश्य से जिले में हसदेव क्रूज एण्ड एडवेंचर स्पोर्टस सोसाईटी कोरबा  का गठन किया गया है।
        इसी कड़ी में सतरेंगा के 11 स्थानीय निवासियों को पावर मोटर बोट्स चालन एवं सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है। जल्द ही यहां पर्यटन की गतिविधियों जिसमें बोटिंग, स्पीड बोटिंग, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, ओपेन एयर ऑडिटोरियम तथा रिसॉर्ट आदि की शुरूआत की जाएगी। पर्यटकों के रूकने के लिए क्रूज, फ्लोटिंग कॉटेजेस के निर्माण के साथ ही अन्य साहसिक एवं जलक्रिड़ा की गतिविधियां भी यहां प्रारंभ की जाएंगी।

  • कृषि मेले में पहली बार सोलर कोल्ड स्टोरेज एवं सोलर ड्रायर का लाइव प्रदर्शन

    रायपुर के तुलसी बाराडेरा स्थित थोक मंडी परिसर में 23 से 25 फरवरी तक आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेला में क्रेडा पहली बार सोलर कोल्ड स्टोरेज एवं सोलर ड्रायर के लाइव माडल प्रदर्शित किया जावेगा। इसका आकार 20 फीट के कंटेनर जितना होता है। यह 4.5 किलोवाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट से संचालित होता है। सौर उर्जा न होने पर भी कोल्डरूम 24 से 30 घंटे तक बैकअप प्रदान करता है, जो थरमोफ्लूडस के कारण होता है। सरकार द्वारा इस पर 4 लाख रूपये का अनुदान का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कृषको को उनकी उपज का सही संरक्षण कर धनोपार्जन में वृद्वि का सरल समाधान कोल्ड स्टोरेज है। कोल्ड स्टोरेज में 5 टन तक फल व सब्जी रखी जा सकती है। प्रदेश में अभी तक 50 सोलर कोल्ड स्टोरेज स्थापित किया गया है।
    क्रेडा स्टाल में बायो गैस का जीवंत माडल भी प्रदर्शित किया जा रहा है। शासन की महत्वपूर्ण योजना नरवा, गरवा, घुरूवा, बाड़ी योजनान्तर्गत कृषको के यहॉ बायो गैस संयंत्र स्थापित किये जा रहे है। सरकार द्वारा बायोगैस संयंत्र के निर्माण पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानो को 22 हजार रूपये, सामान्य वर्ग के किसानों को 21 हजार रूपये का अनुदान दिया जा रहा है। प्रदेश के बन रहे गोठानों में भी बायो गैस संयंत्र निर्माण का कार्य प्राथमिकता में किया जा रहा है। प्रदेश में अभी तक क्रेड़ा द्वारा 57700 बायो गैस प्लांट स्थापित किये जा चुके है। स्टाल में सोलर ड्रायर भी प्रदर्शित किया गया है, जिसके उपयोग से किसान अपनी सब्जीयों या फलो को संरक्षित कर अपने उपयोग हेतु रख सकते हैं। सोलर ड्रायर का अनुकूल तापमान 60 डिग्री होने के कारण सब्जी-बीजो की आद्रता पूर्णतः निकल जाती है, जिससे सब्जियों में फफूंद, बैक्टिरिया पैदा नहीं हो पाते। क्रेडा द्वारा सोलर जल शुद्धिकरण संयंत्र का माडल भी प्रदर्शित किया जायेगा, इसमें अशुद्ध जल का शुद्धिकरण संयंत्र से शुद्ध कर पीने योग्य किया जाता है। प्रदेश में अभी तक लगभग 280 सौर जल शुद्धिकरण संयंत्र स्थापित किये जा चुके है। इसमें शासन द्वारा 03 लाख रूपये प्रति संयंत्र अनुदान का प्रावधान है।
    सौर सुजला योजनान्तर्गत किसानो के खेतो में अभी तक लगभग 60 हजार सोलर पम्प लगाये जा चुके है और 2020 में लगभग 20 हजार सोलर पम्प लगाने हेतु कार्य तेजी से किया जा रहा है। 3 एच.पी. क्षमता का सोलर पम्प अनुसूचित जाति, और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषको को 07 हजार रूपये, पिछड़ा वर्ग के किसानों को 12 हजार रूपये और सामान्य वर्ग के किसानों को 18 हजार रूपये में 5 वर्ष के मेंटेनेस के साथ लगाकर दिया जा रहा है। सोलर पम्प स्थापना में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है।

  • परिवहन आयुक्त ने बीएस-4 वाहनों के पंजीयन अपू्रवल के लिए लंबित समस्त प्रकरणों को 29 फरवरी तक जमा कराने के दिए निर्देश*
    *भारत स्टेज-4 वाहनों का एक अप्रैल से नहीं होगा पंजीयन* * रायपुर, 22 फरवरी 2020/ एक अप्रैल 2020 से भारत स्टेज-4 (BS-4) वाहनों का पंजीयन नहीं किया जाना है। इस संबंध में परिवहन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह द्वारा राज्य के समस्त क्षेत्रीय, अतिरिक्त क्षेत्रीय तथा जिला परिवहन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत सभी वाहन डीलर्स को लिखित रूप से अवगत कराएं कि बीएस-04 वाहनों के पंजीयन अप्रूवल के लिए समस्त लंबित प्रकरण 29 फरवरी 2020 तक आवश्यक रूप से जमा करें, ताकि वाहन विक्रेता के द्वारा विक्रय किए गए समस्त बीएस-04 वाहनों का पंजीयन किया जा सके। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि वाहन विक्रेता द्वारा यदि क्रेता को बीएस-04 वाहन बिक्री किया गया है तो सम्पूर्ण वैध दस्तावेज प्राप्त कर निर्धारित समयावधि में उसका पंजीयन की कार्रवाई पूर्ण कर लेंवे। परिवहन आयुक्त द्वारा जारी निर्देश में अवगत कराया गया है कि चूंकि एक अप्रैल 2020 से बीएस-04 वाहनों का पंजीयन नहीं किया जाना है, ऐसी स्थिति में काफी संख्या में पंजीयन प्रकरण लंबित हो सकते हैं। साथ ही अंतिम समय में अत्यधिक कार्यभार की वजह से विभिन्न तकनीकी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है, जिससे वाहन क्रेता को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत गैर-परिवहन तथा परिवहन वाहनों का पंजीयन के लिए निर्धारित अधिकतम 30 कार्य दिवस और वाहनों का अस्थायी पंजीयन के लिए निर्धारित अधिकतम 15 कार्य दिवस में पंजीयन कार्यवाही सम्पादित किया जाना है। अतएव इस आधार पर वाहन विक्रेता अथवा क्रेता के हितों को ध्यान में रखते हुए वाहन डीलर्स से 29 फरवरी 2020 तक पंजीयन फाइलें प्राप्त करने के लिए जिले के वाहन डीलर्स को सूचित किया जाए, ताकि क्रय किए गए समस्त बीएस-4 वाहनों का पंजीयन 31 मार्च 2020 तक किया जा सके। राज्य में प्रचलित डीलर प्वाईंट वाहन रजिस्टेªशन की प्रक्रिया में वाहन विक्रेता डीलर के द्वारा विक्रय की गई वाहनों का पंजीयन चिन्ह तत्काल आवंटित किया जाता है, तत्पश्चात वाहन विक्रेता डीलर के द्वारा पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेज परिवहन कार्यालय में जमा किया जाता है। डीलर द्वारा जमा किए गए समस्त आवश्यक वैध दस्तावेजों की जांच करने के पश्चात पंजीयन प्राधिकारी द्वारा वाहन-4.0 पोर्टल में वाहन का पंजीयन अप्रूवल किया जाता है। तत्पश्चात ही वाहन पूर्ण रूप से पंजीकृत माना जाता है। चूंकि एक अप्रैल 2020 से बीएस-04 वाहनों का पंजीयन नहीं किया जाना है। इस संबंध में निर्देशित किया गया है कि जिन वाहनों का वैध दस्तावेज परिवहन कार्यालय में जमा नहीं किया गया है और वाहन-04 में अप्रूवल शेष है। उन सभी वाहनों का पंजीयन सुनिश्चित करने के लिए लंबित समस्त प्रकरण 29 फरवरी 2020 तक जमा कर लिया जाए। यह भी पाया जाता है कि वाहन विक्रेताओं से डिस्काउंट/ऑफर की उम्मीद में क्रेता द्वारा अंतिम दिवस तक इंतजार किया जाता है। इस संबंध में यदि वाहन डीलर्स स्वेच्छा से डिस्काउंट/ऑफर देना चाहते हैं तो अंतिम दिवस का इंतजार करने की बजाए फरवरी में ही यह कार्यवाही कर सकते हैं। परिवहन आयुक्त द्वारा समस्त पंजीयन प्राधिकारी को इसका क्षेत्र में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने परिवहन अधिकारियों को जिलों में पंजीकृत वाहन डीलर्स वाहनों के भारत स्तर-4 के स्टॉक से संबंधित विवरण लिखित रूप में 25 फरवरी 2020 तक प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि स्टॉक के समाप्त होने तक भारत स्तर-4 की गाड़ियों को पंजीकृत करने में नियमानुसार कोई अवरोध अथवा दिक्कत ना हो।
  • Mann Ki Baat, February 2020

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का फरवरी २०२० का एपिसोड २३ फरवरी को प्रसारित होगा 

  •  माँ का दर्द - शहीद बेटे की अस्थियां
    पिछले 3 सालों से एक माँ अपने शहीद बेटे की अस्थियों को अपने पास रखकर शासन-प्रशासन से गुहार लगा रही है, की उसके शहीद बेटे को सम्मान दिया जाए, माँ शासन- प्रशासन सिर्फ इतना ही चाह रही है, की उसके गांव में संचालित स्कूल का नाम उसके शहीद बेटे के नाम से जाना जाए और गांव में शहीद बेटे का एक स्मारक बना दिया जाए, जो कि नियम में भी है। जिस थैले में कमजोर व असहाय माँ अपने शहीद बेटे की अस्थियों को लेकर चलती है अब वह थैली भी जवाब देने लग गया है, लेकिन इस बूढ़ी माँ की पुकार कोई नही सुन पा रहा है। जिले के डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र के सोनेसरार गांव का एक जवान हेमन्त महितकर 2013 में 10 वीं बटालियन छसबल में भर्ती होता है, जिसकी पदस्थापना प्रदेश के बीजापुर जिले के मिरतूर थाने में होती है। 03 मार्च 2017 को थाना क्षेत्र के चेटली चितौडीपारा में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा होता है, जिसमें सड़क निर्माण कर रहे लोगों को सुरक्षा देने निकली फोर्स को जंगल मे घात लगाकर बैठे नक्सली हमला कर देते है जिसमे जवान हेमन्त महितकर शहीद हो जाता है। शासन- प्रशासन के नियमों के अनुसार जिस गांव का जवान शहीद होता है, उस गांव के स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखा जाए, और गांव में ही शहीद का एक स्मारक शहीद के नाम से बनाया जाए। लेकिन घटना को 3 साल बीत गए इस गांव में ऐसा कुछ देखने नही मिला, शहीद की बूढ़ी माँ ने बताया कि पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों ने उसे बताया था कि जिस दिन भी शहीद के नाम का स्मारक गांव में बनाया जाएगा, उसी स्मारक में शहीद की अस्थियों को डाल देना। शासन- प्रशासन ने नियमानुसार शहीद के स्मारक के लिए गांव के हाई स्कूल में जगह को चिन्हित किया और स्कूल का नामकरण के लिए स्कूल विभाग द्वारा प्रस्ताव भी बनाया गया,लेकिन जिस जगह का चयन किया गया, प्रशासन ने शहीद के परिजनों को जानकारी नही दी और पंचायत ने निर्माण कर डाला, जिस जगह पर शहीद का आधा अधूरा स्मारक बनाया गया वहां स्कूल के मल-मूत्र का पानी आता है, जिसे शहीद की माँ अपने बेटे का अपमान समझती है, उस समय से शहीद की माँ शासन- प्रशासन से गुहार लगा रही है कि निर्माण स्थल से कुछ ही दूरी पर स्मारक बनाया जाए जिससे स्मारक के नीचे उसके बेटे की अस्थियों पर मल-मूत्र का पानी ना पहुंचे। स्कूल के प्राचार्य का कहना है कि स्कूल का नाम शहीद के नाम पर करने के लिए कई बार प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है लेकिन गांव की पंचायत में सहमति नही बनने के कारण नामकरण नही हो पा रहा है। सोनेसरार गांव समुदाय विशेष गांव है, शहीद हरिजन वर्ग से आता है,ऐसा बताया जा रहा है कि गांव में हरिजन वर्ग के केवल 4 ही परिवार निवास करते है, समुदाय विशेष वर्ग के लोग अधिक होने के कारण भी स्मारक और स्कूल के नामकरण में दिक्कत आ रही है, क्योंकि स्मारक का निर्माण और स्कूल का नामकरण पंचायत को ही करना है, पंचायत में कई बैठक भी हो गई, लेकिन सहमति नही होने के कारण ना ही शहीद का स्मारक बन पा रहा है, और ना ही स्कूल का नामकरण हो पा रहा है, ऐसे में शहीद की माँ शासन-प्रशासन, स्थानीय नेता, विधायक, मंत्री, तात्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सभी से गुहार लगा चुकी है, लेकिन शहीद की माँ को पिछले 3 सालों से केवल आस्वाश्न ही मिल रहा है, जिस थैली में शहीद की अस्थियों को शहीद की माँ ने सहेज कर रहा है अब वो भी फटने लगी है। बेटा यदि सेना या फ़ौज में जाता है तो माँ बाप और पूरे गांव का सीना चौड़ा हो जाता है, और कहि मुठभेड़ में जवान बेटा शहीद हो जाता है, तो माँ- बाप का सिर फक्र से ऊंचा हो जाता है कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हो गया, साथ ही उस गांव का नाम भी रोशन हो जाता है, जिस गांव का बेटा शहीद होता है, लेकिन इस गांव के लिए मानों शहीद जवान अभिश्राप हो गया हो। दुश्मन की गोली जातपात, धर्म, मज़हब नही पहचानती, ओ तो सिर्फ अपने लक्ष्य को भेददी है, फिर शहीद के सम्मान में जात-पात क्या होता है, जवान तो सिर्फ देश का होता है। पूरे मामले में जिले के एएसपी का कहना है, की विभाग ने स्मारक और स्कूल के नामकरण के लिए जिला कलेक्टर को लिख दिया है। बस इतना कहकर पुलिस विभाग के अधिकारी ने अपना पल्ला झाड़ लिया पिछले 3 सालों से एक तरफ बेटे को सम्मान दिलाने अधिकारियों और नेताओं के चक्कर, तो दूसरी तरफ बूढ़ी माँ के लिए तंगहाल जिंदगी, बेटे के शहीद होने के बाद बहू को बेटे की जगह अनुकंम्पा नियुक्ति मिली, उसने भी अपनी बूढ़ी सांस का घर छोड़ दिया, अब शहीद की माँ अपना गुजर बसर करने के लिए गांव में ही रोजगार गारंटी में मिट्टी खोदने जा रही है। जब से इस बूढ़ी माँ का बेटा शहीद हुआ है, प्रतिवर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी को पुलिस विभाग शहीदों के परिजनों का सम्मान श्रीफल और साल भेंट कर करती है, हर बार शहीद की विभाग से आयोजन के दौरान विभाग के अधिकारियों से यही गुहार लगाती है , की उसके बेटे को सम्मान दिला दे, साल और श्रीफल की जरूरत मुझे नही है। पता नही शहीद बूढ़ी माँ को और कितना इंतजार करना पड़ेगा अपने शहीद बेटे को सम्मान दिलाने में और अब कब तक अपने सीने से लगा रखेगी अपने शहीद बेटे की अस्थियों को... विपुल कनैया (संवाददाता, राजनांदगांव)