धार्मिक ग्रंथों और वाल्मीकि रामायण के अनुसार प्रभु श्री राम, रावण से कहीं अधिक शक्तिशाली और बलवान थे।

धार्मिक ग्रंथों और वाल्मीकि रामायण के अनुसार प्रभु श्री राम, रावण से कहीं अधिक शक्तिशाली और बलवान थे।

धार्मिक ग्रंथों और वाल्मीकि रामायण के अनुसार प्रभु श्री राम, रावण से कहीं अधिक शक्तिशाली और बलवान थे। युद्ध के दौरान जब भी दोनों का आमना-सामना हुआ, हर बार श्री राम ने रावण को परास्त किया।

दोनों की शक्ति की तुलना को इन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:
1. युद्ध में प्रभु राम का वर्चस्व
रामायण के युद्ध कांड के अनुसार, श्री राम ने रावण को युद्ध में कई बार सीधे तौर पर हराया। पहली बार जब उनका आमना-सामना हुआ, तब श्री राम ने अपने तीखे बाणों से रावण के रथ, सारथी, मुकुट और धनुष को नष्ट कर दिया था और उसे निहत्था कर दिया था। दयालु होने के कारण श्री राम ने उसका वध करने के बजाय उसे वापस जाकर आराम करने और अगले दिन आने को कहा था। 
2. दिव्य अस्त्रों और गति का बल
शास्त्रों के अनुसार, प्रभु श्री राम के पास असीमित संहारक क्षमता वाले दिव्य अस्त्र थे। उनकी तीरंदाजी की गति इतनी तीव्र थी कि सामने वाला देख भी नहीं पाता था कि कब बाण निकाला और कब छोड़ दिया गया। उन्होंने अकेले ही वन में १४ हजार राक्षसों का वध किया था, जिसे देवराज इंद्र भी नहीं कर पाए थे।
3. चरित्र और नैतिक बल (धर्म बनाम अधर्म)
रावण के पास अपार भौतिक शक्ति, सोने की लंका, वेदों का ज्ञान और ब्रह्मा-शिव से मिले कई वरदान थे। लेकिन उसके पास चरित्र का बल नहीं था। रावण का अहंकार, काम (वासना) और अधर्म ही उसकी कमजोरी बने। इसके विपरीत, श्री राम "पुरुषोत्तम" (पुरुषों में सबसे उत्तम) थे, जिनका आत्मबल, न्याय और धर्म के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। [1, 
रावण का अंत कठिन क्यों था?
रावण को कोई साधारण मनुष्य या देवता नहीं मार सकता था, क्योंकि उसे ब्रह्मा जी से अमरता जैसा वरदान प्राप्त था। उसकी नाभि में अमृत कलश छिपा था, जिसकी वजह से उसके सिर कटने के बाद भी दोबारा आ जाते थे। जब विभीषण ने श्री राम को यह गुप्त रहस्य बताया, तब श्री राम ने उसकी नाभि पर प्रहार कर अमृत सुखाया और उसका वध किया।
निष्कर्ष: भौतिक संसाधनों और वरदानों के मामले में रावण अत्यंत मायावी और शक्तिशाली था, लेकिन वास्तविक युद्ध कौशल, शस्त्र विद्या और आत्मिक बल में भगवान श्री राम ही सर्वश्रेष्ठ और सबसे ताकतवर थे।